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रानिल विक्रमसिंघे बने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री, संकट से देश को निकालना सबसे बड़ी चुनौती

एक दिन पहले राष्ट्र को संबोधन में राष्ट्रपति गोटाबाया ने ऐलान किया था कि पूर्व पीएम महिंदा और उनकी सरकार द्वारा खाली किए गए पदों को जल्द भरा जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा था कि नई सरकार एक ऐसे प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जाएगी जो संसद में बहुमत हासिल कर सके।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका की सत्ता में बड़ा फेरबदल हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को देश का नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है। उन्हें राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने पद की शपथ दिलाई। दो दिन पहले पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफा के बाद पूर्व पीएम रानिल विक्रमसिंघे को देश की कमान सौंपने का फैसला लिया गया था।

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भोजन, ईंधन, दवा, रसोई गैस और घंटों बिजली कटौती सहित आवश्यक चीजों की कमी से जुड़े गंभीर वित्तीय संकट के बीच प्रदर्शनकारी राजपक्षे सरकार और राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दो दिन पहले सरकार समर्थकों और विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और परिवार समेत कोलंबो छोड़ दिया था।

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इसके बाद पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध के बीच बुधवार रात को राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति गोटाबाया ने घोषणा की कि उनके भाई महिंदा और उनकी सरकार द्वारा खाली किए गए पदों को जल्द भरा जाएगा। गोटाबाया ने यह भी कहा कि वह कार्यकारी अध्यक्ष की 19वीं संशोधन की शक्तियों को फिर से शुरू करने पर काम करेंगे, जो उन्हें स्वयं प्राप्त है और संसद को अधिक शक्तियां प्रदान करेंगे।

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राष्ट्रपति गोटाबाया ने राष्ट्रपति प्रणाली को समाप्त करने पर भी सहमति व्यक्त की। गोटाबाया राजपक्षे ने कहा कि नई सरकार एक ऐसे प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जाएगी जो संसद में बहुमत हासिल कर सके। इसके एक दिन बाद आज सुबह गोटाबाया ने रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का ऐलान किया और शाम में उन्हें पद की शपथ दिलाई।

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