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अंजाम बुरा होगा...बात नहीं मानी तो पावर प्लांट, पुल सब होंगे तबाह, होर्मुज में नाकेबंदी कर ट्रंप ने ईरान को फिर धमकाया

ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने बातचीत का रास्ता नहीं चुना तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

होर्मुज में नाकेबंदी कर ट्रंप ने ईरान को फिर धमकाया
होर्मुज में नाकेबंदी कर ट्रंप ने ईरान को फिर धमकाया  फोटो: सोशल मीडिया

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म होता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने बातचीत का रास्ता नहीं चुना तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

अमेरिकी सेना की बड़ी कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 14 जुलाई की रात अमेरिका ने ईरान के तटीय इलाकों और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। करीब सात घंटे तक चली इस कार्रवाई में लड़ाकू विमान, ड्रोन और नौसैनिक जहाज शामिल रहे। सेंटकॉम का दावा है कि हमलों में मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, तटीय रक्षा प्रणालियों और नौसैनिक क्षमताओं को निशाना बनाया गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बंदरगाहों की नाकेबंदी, अरब सागर में बढ़ी सैन्य मौजूदगी

हवाई हमलों के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी लागू कर दी। उत्तरी अरब सागर में करीब 19 अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए हैं। इनमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर और एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप भी शामिल है, जिस पर एक हजार से ज्यादा मरीन तैनात हैं। सेंटकॉम ने यह भी कहा कि पूरे मध्य-पूर्व में सैकड़ों अमेरिकी सैन्य विमान सक्रिय हैं।

ईरान पर जहाजों पर हमले का आरोप

नाकेबंदी की वजह बताते हुए सेंटकॉम ने आरोप लगाया कि पिछले सात दिनों में ईरान ने सात व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया। अमेरिकी दावे के मुताबिक, इन घटनाओं में कई चालक दल के सदस्य मारे गए, घायल हुए या लापता हैं। अमेरिका ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन भी दागे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर ईरान की ओर से अलग रुख सामने आया है।

ट्रंप ने बदला होर्मुज टोल का फैसला

इस बीच, ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत टोल लगाने का अपना प्रस्ताव वापस ले लिया। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत के बाद यह फैसला बदला गया। ट्रंप ने कहा कि टोल वसूलने के बजाय खाड़ी देश अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश करना चाहते हैं और इसी दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।

'बात नहीं मानी तो पावर प्लांट और पुल भी निशाने पर'

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता है तो उसके पावर प्लांट, पुल और अन्य रणनीतिक ढांचों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

ईरान का पलटवार, जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ट्रंप के बयान का जवाब देते हुए कहा कि ईरान अपने देश के हर इंच की रक्षा करेगा और किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों की आलोचना करते हुए कहा कि दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी।

दोनों पक्षों के हमलों के दावे

अमेरिकी कार्रवाई से पहले ईरान के केशम द्वीप, बंदर अब्बास और अहवाज जैसे इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं। वहीं, ईरानी मीडिया और अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन की दिशा में भी जवाबी हमले किए। इसके अलावा, ईरान का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे संयुक्त अरब अमीरात के दो तेल टैंकरों को चेतावनी के बाद निशाना बनाया गया, क्योंकि उन्होंने निर्देशों की अनदेखी की थी।

पानी की फैक्ट्री भी हमले की चपेट में

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, पश्चिमी ईलाम प्रांत के मुसियन जिले के पास स्थित एक बोतलबंद पानी की फैक्ट्री पर तीन प्रोजेक्टाइल गिरे। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, फैक्ट्री के उपकरणों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

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