
ईरान में मार गिराए गए अमेरिकी लड़ाकू विमान F-15E के दोनों पायलटों को आखिरकार सुरक्षित निकाल लिया गया है। 3 अप्रैल को ईरान द्वारा विमान गिराए जाने के बाद एक पायलट को उसी दिन बचा लिया गया था, जबकि दूसरा पायलट दो दिनों तक लापता रहा। अब अमेरिकी सेना की रेस्क्यू टीम ने उसे भी सुरक्षित निकाल लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि करते हुए इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक बताया है।
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दरअसल, 3 अप्रैल को ईरान ने अमेरिकी सेना के F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को मार गिराया था। इस विमान में एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर सवार थे। घटना के बाद अमेरिका ने ईरान के भीतर ही बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पहले पायलट को तुरंत निकाल लिया गया, लेकिन दूसरा पायलट दुश्मन के इलाके में फंसा रह गया।
इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जमकर गोलीबारी भी हुई। हालात बेहद तनावपूर्ण थे, क्योंकि लापता पायलट को लेकर दोनों देशों की सेनाएं सक्रिय थीं।
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डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर बताया कि लापता पायलट ईरान के खतरनाक पहाड़ी इलाकों में दुश्मन की सीमा के पीछे फंसा हुआ था। दुश्मन लगातार उसकी तलाश में था और हर घंटे उसके करीब पहुंच रहा था।
ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी सेना, वॉर सेक्रेटरी, जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ और अन्य सैन्य अधिकारी 24 घंटे उसकी लोकेशन पर नजर रख रहे थे और उसे सुरक्षित निकालने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब दुश्मन के इलाके के इतने भीतर से दो अमेरिकी पायलटों को सफलतापूर्वक बचाया गया है।
ट्रंप ने यह भी बताया कि ऑपरेशन में घातक हथियारों से लैस दर्जनों विमान ईरान में दाखिल हुए और पायलट को निकालकर सुरक्षित लाया गया। पायलट को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वह जल्द ठीक हो जाएगा।
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F-15E गिराए जाने के बाद लापता पायलट को लेकर अमेरिका और ईरान दोनों ही सक्रिय हो गए थे। ईरानी सेना ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया और पायलट की जानकारी देने वाले को 60 हजार डॉलर इनाम देने का ऐलान किया।
समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, ईरान ने अपनी सेना के साथ कबीलाई लोगों को भी तलाश में लगाया था। वहीं, ईरानी मीडिया तस्नीम न्यूज ने दावा किया था कि अमेरिका अपने ही पायलट को मारने के लिए बमबारी कर रहा है।
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28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच F-15E पहला अमेरिकी विमान था, जिसे ईरानी सेना ने मार गिराया। F-15E स्ट्राइक ईगल की कीमत करीब 3.11 करोड़ डॉलर (लगभग 289 करोड़ रुपये) बताई जाती है।
इसी दिन ईरान ने कुवैत के ऊपर एक और अमेरिकी विमान A-10 वॉरथॉग फाइटर जेट को भी मार गिराने का दावा किया, जिसकी कीमत करीब 1.88 करोड़ डॉलर (लगभग 174 करोड़ रुपये) है।
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