
अमेरिका में आज मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान होगा, ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने बहुमत बचाने की चुनौती है।
प्रतिनिधि सभा की सभी 435 और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है।
महंगाई, आव्रजन, स्वास्थ्य सेवाएं और ईरान संघर्ष प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं।
नतीजे तय करेंगे कि अगले दो साल ट्रंप कितनी राजनीतिक ताकत के साथ सरकार चला पाएंगे।
अमेरिका में आज होने वाले मध्यावधि चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने प्रतिनिधि सभा और सीनेट में अपना बहुमत बचाने की बड़ी चुनौती है, जबकि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की कोशिश कांग्रेस के कम से कम एक सदन में बहुमत हासिल करने की है। चुनाव के नतीजे न केवल अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि ट्रंप प्रशासन के अगले दो वर्षों के कामकाज और नीतिगत फैसलों पर भी सीधा असर डालेंगे।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इस दौरान राष्ट्रपति पद के लिए मतदान नहीं होता, बल्कि मतदाता कांग्रेस के सदस्यों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को चुनते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की कुल 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हो रहा है। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे।
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है, लेकिन प्रतिनिधि सभा में उसका बहुमत बेहद मामूली है। यहां रिपब्लिकन के पास 218 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 214 सीटें हैं। ऐसे में कुछ सीटों का उलटफेर भी सदन का राजनीतिक गणित बदल सकता है। वहीं, सीनेट में रिपब्लिकन 53-47 के अंतर से आगे हैं।
डेमोक्रेट्स के लिए इस चुनाव में कम से कम एक सदन में बहुमत हासिल करना अहम है। अगर पार्टी प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण हासिल कर लेती है, तो उसे विभिन्न सरकारी समितियों की अध्यक्षता और सरकारी खर्च से जुड़े फैसलों में प्रभाव बढ़ाने का मौका मिलेगा। इससे ईरान के साथ जारी संघर्ष के लिए सरकारी धन आवंटित करने जैसे मुद्दों पर भी ट्रंप प्रशासन को राजनीतिक चुनौती मिल सकती है।
सीनेट में डेमोक्रेट्स की जीत का असर और भी व्यापक होगा। इससे पार्टी को न्यायाधीशों और कैबिनेट में राष्ट्रपति की ओर से नामित उम्मीदवारों की नियुक्ति की पुष्टि की प्रक्रिया पर नियंत्रण मिल सकता है। हालांकि, डेमोक्रेट्स के सामने सीनेट में बहुमत हासिल करना आसान नहीं है। चुनावी मुकाबले ऐसे राज्यों में भी हैं, जहां ट्रंप को पिछले चुनाव में जीत मिली थी और कुछ जगहों पर उनकी जीत का अंतर दो अंकों में था। ऐसे में प्रतिनिधि सभा में सफलता के बावजूद सीनेट में हार पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
इस बार मध्यावधि चुनाव को ट्रंप प्रशासन के कामकाज पर जनता की पहली बड़ी राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखा जा रहा है। महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ता खर्च आम मतदाताओं के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं, आव्रजन नीति और ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर भी चुनावी बहस तेज है।
ट्रंप ने इन चुनावों को अपने दूसरे प्रशासन के शुरुआती 20 महीनों के कामकाज पर जनमत संग्रह करार दिया है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की थी कि वे इस तरह मतदान करें, जैसे उम्मीदवार खुद वही हों। ऐसे में चुनाव परिणामों को उनकी नीतियों और नेतृत्व के प्रति जनता के समर्थन या नाराजगी के संकेत के तौर पर भी देखा जाएगा।
अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में मतदान समाप्त होने का समय अलग-अलग है। शुरुआती राज्यों में स्थानीय समय के अनुसार शाम 6 बजे (ईएसटी) मतदान खत्म होगा। हालांकि, करीबी मुकाबलों के नतीजों के लिए मतदाताओं को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। अलास्का में रैंक-चॉइस मतदान प्रणाली के तहत होने वाली मतगणना और कैलिफोर्निया में धीमी मतगणना इसकी प्रमुख वजह हो सकती है।
इस चुनाव से चुने जाने वाले नए सांसद 3 जनवरी 2027 को शपथ लेंगे। इसके बाद कांग्रेस में नए राजनीतिक समीकरण के साथ कामकाज शुरू होगा। ऐसे में मंगलवार का मतदान सिर्फ सीटों की जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी तय करेगा कि ट्रंप प्रशासन को अगले दो वर्षों में अपने फैसले लागू करने के लिए कितना राजनीतिक समर्थन मिलेगा।
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