
ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि और वरिष्ठ राजनयिक अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले के लिए अमेरिका ने अब तक माफी नहीं मांगी है। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में 168 बच्चों की मौत हुई थी और कुछ बच्चों के शव आज तक नहीं मिल सके हैं।
नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के एक सत्र "ए रीजन इन फ्लक्स: हू विल शेप द मिडिल ईस्ट्स फ्यूचर?" में बोलते हुए इलाही ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस हमले की निंदा करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न होने देने की अपील की।
इलाही ने कहा, "हमारे देश और शासन को कई जटिल समस्याओं और संकटों का सामना करना पड़ा है। केवल ईरान और मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई लोग कुछ देशों द्वारा पैदा किए गए युद्धों के कारण पीड़ित हैं। उन्होंने ईरान पर हमला किया और 28 फरवरी को एक प्राथमिक स्कूल पर हमला कर 168 निर्दोष बच्चों की जान ले ली। आज तक कुछ बच्चों के शव नहीं मिले हैं और उनके माता-पिता अब भी रो रहे हैं, क्योंकि उनके पास अपने बच्चों की कोई कब्र तक नहीं है जहां वे जाकर शोक मना सकें।"
28 फरवरी को ईरान के मिनाब स्थित शजरे तैय्यबेह स्कूल पर हुए हमले में 160 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी।
इलाही ने कहा, "अक्टूबर में ईरान के स्कूलों का नया शैक्षणिक सत्र शुरू होता है, लेकिन अब वहां वे बच्चे नहीं हैं और लोग इस दुख को झेल रहे हैं। दुर्भाग्य से अमेरिका ने आज तक हमारे प्राथमिक स्कूल पर हमले जैसी बड़ी गलती के लिए माफी नहीं मांगी है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस घटना की जांच के लिए एक समिति भेजी थी और उसकी रिपोर्ट में कहा गया कि इस हमले में 125 बच्चों की मौत हुई थी।"
उन्होंने कहा कि ईरान सभी स्वतंत्र लोगों और मानवाधिकारों में विश्वास रखने वाले लोगों से अपील करता है कि वे ऐसी त्रासदियों की आलोचना करें ताकि यह फिर कभी न दोहराई जाए, चाहे ईरान में हो या किसी अन्य देश में।
इलाही ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर चल रही अटकलों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और सक्रिय रूप से अपना काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे राष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह बताया था कि उनकी खामेनेई के साथ सात घंटे लंबी बैठक हुई थी। संसद अध्यक्ष भी जल्द भारत आने वाले हैं और उन्होंने भी कहा है कि उनकी हाल ही में कई घंटों तक मुलाकात हुई। मेरे कुछ मित्र भी उनसे मिले हैं और उन्होंने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपना काम अच्छे तरीके से कर रहे हैं।"
चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का भूकंप आने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और 76 अन्य लोग घायल हो गए, जिसके बाद 12,000 से अधिक निवासियों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के बाद चीन ने जिंदा बचे लोगों की तलाश के लिए क्षेत्र में उपग्रह और ड्रोन तैनात किए।
अधिकारियों के मुताबिक, बृहस्पतिवार रात करीब 10 बजकर 33 मिनट (स्थानीय समय) पर नागकू शहर की बाकेन काउंटी में आए भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर से भी कम गहराई पर था।
सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने क्षेत्रीय राजधानी ल्हासा से खबर दी कि अब तक 12,489 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है। उसने बताया कि बचाव एवं राहत अभियान के साथ-साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करने का काम जारी है।
चीन एयरोस्पेस विज्ञान और प्रौद्योगिकी निगम (सीएएससी) ने शुक्रवार को बताया कि बचाव कार्यों में मदद के लिए चीन ने भूकंप प्रभावित इलाके में आपातकालीन संचार सुविधा देने और वहां की तस्वीरें लेने के लिए उपग्रहों और मानवरहित विमानों को तैनात किया है।
तिब्बती पठार को भूकंप के खतरे के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह क्षेत्र उस स्थान के ठीक ऊपर स्थित है, जहां यूरेशियाई एवं भारतीय टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं, जिससे भूकंपीय कंपन पैदा होती है।
‘शिन्हुआ’ के अनुसार, चीन ने भूकंप के बाद आपातकालीन आपदा राहत के लिए लगभग 75 लाख अमेरिकी डॉलर (पांच करोड़ युआन) आवंटित किए हैं और पुनर्वास कार्यों के लिए तीन करोड़ युआन की अतिरिक्त राशि निर्धारित की है।
इससे पहले आई खबरों के अनुसार, भूकंप में 330 से अधिक मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हो गए। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। गंभीर रूप से घायल लोगों की संख्या सहित 76 घायलों का विस्तृत ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका।
चाइना रेलवे छिंगहाई-तिब्बत ग्रुप कंपनी लिमिटेड ने बताया कि प्रभावित हिस्से में छिंगहाई-तिब्बत रेलवे पर यात्री ट्रेन का परिचालन शुक्रवार सुबह कम गति से फिर शुरू कर दिया गया।
‘स्टेट ग्रिड शिजांग इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड’ ने बताया कि शुक्रवार सुबह 10 बजे (स्थानीय समय) तक भूकंप प्रभावित बाकेन काउंटी में 1,937 घरों की बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई थी।
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति एवं देश के प्रभावशाली राजपक्षे राजनीतिक परिवार के प्रमुख महिंदा राजपक्षे ने कथित भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद अपने बेटे और परिवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी नमल राजपक्षे को शुक्रवार को एक भावुक संदेश भेजा।
महिंदा के तीन बेटों में सबसे बड़े नमल राजपक्षे (40) रिश्वतखोरी और अन्य मामलों में जारी जांच के सिलसिले में चार सितंबर से न्यायिक हिरासत में हैं। बंद पड़ी भारतीय ‘क्रिश होटल्स’ परियोजना से जुड़े एक मामले में उनकी न्यायिक हिरासत शुक्रवार को छह नवंबर तक बढ़ा दी गई।
महिंदा राजपक्षे (81) ने जेल में अपने बेटे को भेजे पत्र में कहा, ‘‘मैं तुम्हें 2010 में दी गई अपनी वह सलाह याद दिलाना चाहता हूं, जब तुम राजनीति में आना चाहते थे। (मैंने कहा था) राजनीति में आना तुम्हारी इच्छा है, लेकिन जेल जाने और कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार रहना।’’
पिछले दो दशक में श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, दोनों पदों पर रह चुके महिंदा राजपक्षे ने कहा कि नमल ने राजनीति में आने के लिए उनसे अनुमति मांगी थी और उन्होंने अपने बेटे को जेल जाने तथा कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार रहने की सलाह दी थी।
उन्होंने कहा कि यह सलाह उनके उस अनुभव पर आधारित है जब राजनीति में आने के कुछ समय बाद उन्हें ‘‘निराधार’’ आरोपों में जेल जाना पड़ा था। उस समय नमल का जन्म भी नहीं हुआ था।
महिंदा ने अपने बेटे को न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि जब वह खुद जेल में थे, तब न्यायपालिका पर विश्वास ही उनके लिए एकमात्र सहारा था।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि संयोग से वह और नमल की मां शिरंती इस समय उसी निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां 1986 में नमल का जन्म हुआ था।
शिरंती राजपक्षे को सात अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और 10 दिन बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। उनकी हृदय की सर्जरी हुई है।
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