
पाकिस्तान में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अगले महीने से एलएनजी (एलएनजी) की आपूर्ति लगभग शून्य होने की आशंका है, जिससे कुल बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा।
कराची स्थित बिजनेस रिकॉर्डर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, एलएनजी की कमी से कुल बिजली उत्पादन का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रभावित होगा, जबकि कोयले की आपूर्ति पर दबाव के कारण करीब 30 प्रतिशत बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
स्थिति से निपटने के लिए सरकार फर्नेस ऑयल का सहारा लेने पर मजबूर है, लेकिन इससे बिजली उत्पादन की लागत काफी बढ़ जाती है। गैस और कोयले के मुकाबले फर्नेस ऑयल से बिजली बनाना महंगा पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार रोजाना 2 से 3 घंटे की लोड शेडिंग, बिजली दरों में बढ़ोतरी और ऊर्जा बचत जैसे कदम उठाने की योजना बना रही है। हालांकि, इन उपायों की सफलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजारों को जल्दी बंद करना और अधिक बिजली खपत वाली रोशनी पर प्रतिबंध जैसे सरल उपाय पहले भी असरदार साबित हुए हैं, लेकिन इन्हें मौजूदा रणनीति में प्राथमिकता नहीं दी गई है। इससे बोझ आम जनता और उद्योगों पर ज्यादा पड़ सकता है।
रिपोर्ट में घरेलू कुप्रबंधन को भी संकट का बड़ा कारण बताया गया है। पाकिस्तान रेलवे और कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के बीच विवाद के चलते 1500 से 1800 मेगावाट बिजली उत्पादन खतरे में है। कोयले के परिवहन में बाधाएं, वैगन लोडिंग में देरी और समन्वय की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शुक्रवार को दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स की “नई उन्नत रक्षा प्रणाली” ने मध्य ईरान के आसमान में अमेरिका के एक और एफ-35 फाइटर जेट को मार गिराया है।
ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना गिराए गए फाइटर जेट के पायलट को खोजने के लिए अभियान चला रही है, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिमी ईरान के कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत में अमेरिकी बलों ने पायलट को तलाशने के लिए ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और सी-130 हरक्यूलिस विमान का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके प्रयास विफल रहे।
बताया गया है कि जेट के नष्ट होने के बाद पायलट ने इजेक्ट कर लिया था और वह ईरान के भीतर ही उतरा। आईआरजीसी के मुताबिक, यह लड़ाकू विमान लैकनहीथ स्क्वाड्रन का था और पूरी तरह तबाह हो चुका है।
तस्नीम की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी पायलट को ईरानी सैन्य बलों ने पकड़ लिया हो सकता है। हालांकि, कुछ सूत्रों का कहना है कि अमेरिका को शक है कि पायलट जीवित है और उसे निकालने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की वायु रक्षा प्रणाली द्वारा अवरुद्ध की गई मिसाइलों के मलबे के कारण अबू धाबी में शुक्रवार को पांच भारतीय नागरिक घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।
यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम की खबर के अनुसार, प्राधिकारियों ने पुष्टि की कि इस घटना में छह नेपाली नागरिकों और पांच भारतीय नागरिकों को मामूली से मध्यम चोटें आई हैं।
अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार, एक अन्य नेपाली नागरिक गंभीर रूप से घायल हुआ है यानी कुल 12 लोग घायल हुए हैं।
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों ने शुक्रवार को ईरान की ओर से दागी गई 18 बैलिस्टिक मिसाइल, चार क्रूज मिसाइल और 47 मानव रहित यान (यूएवी) को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही अवरुद्ध कर दिया।
ईरानी हमलों की शुरुआत से अब तक यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों ने 475 बैलिस्टिक मिसाइल, 23 क्रूज मिसाइल और 2,085 मानव रहित यान (यूएवी) को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से रोका है।
बयान में बताया गया कि इन हमलों में सशस्त्र बलों के दो सदस्यों की मौत हुई है और सशस्त्र बलों के लिए अनुबंध पर काम कर रहा मोरक्को का एक नागरिक भी इन हमलों में मारा गया है।
इसमें कहा गया है कि इन हमलों में अब तक पाकिस्तानी, नेपाली, बांग्लादेशी, फलस्तीनी और भारतीय नागरिकता के नौ लोगों की मौत हुई है।
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सूडान के अर्धसैनिक बलों द्वारा बृहस्पतिवार को देश के दक्षिण-मध्य भाग में स्थित एक अस्पताल पर ड्रोन से किये गए हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य समूह ने यह जानकारी दी।
‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (एमएसएफ) नामक समूह ने बताया कि सूडानी अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) ने व्हाइट नाइल प्रांत के अल-जबलैन अस्पताल पर ड्रोन से दो हमले किए। इस हमले में एक ऑपरेशन थिएटर और एक प्रसूति वार्ड को निशाना बनाया गया।
समूह ने बताया कि सेना और आरएसएफ के बीच गृहयुद्ध जारी है और इन ड्रोन हमलों में सात चिकित्सा कर्मियों सहित 10 लोग मारे गए और कम से कम 19 लोग घायल हो गए। उसने बताया कि घायलों को लगभग 50 मील (80 किलोमीटर) दूर स्थित कोस्ती के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक सूडान में लगभग तीन साल से चल रहे संघर्ष में 40,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। हालांकि, सहायता समूहों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
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