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दुनिया की खबरें: अमेरिका-ईरान युद्ध से पाक बेहाल और नेतन्याहू का दावा, लेबनान में हिजबुल्ला की सुरंगें तबाह

अमेरिका-ईरान युद्ध ने पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान द्वारा हासिल की गई आर्थिक प्रगति को गंभीर झटका दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार दोनों युद्धरत पक्षों के बीच तनाव कम करने और पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के प्रयासों को जारी रखेगी।

पीएम शहबाज शरीफ
पीएम शहबाज शरीफ  

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध ने पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान द्वारा हासिल की गई आर्थिक प्रगति को गंभीर झटका दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार दोनों युद्धरत पक्षों के बीच तनाव कम करने और पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के प्रयासों को जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक बाजारों में ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध से पहले साप्ताहिक तेल खर्च लगभग 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर था, जो आज बढ़कर 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया है।’’

‘जियो टीवी’ की खबर के अनुसार, यहां कैबिनेट की बैठक के दौरान शहबाज ने कहा कि एक कार्य बल रोजाना स्थिति पर नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

कैबिनेट को अमेरिका-ईरान वार्ता में हुई प्रगति और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों से अवगत कराते हुए शहबाज ने कहा कि इस्लामाबाद ने क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए हैं।

उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू हुई जो 21 घंटे तक चली। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों के बीच फिलहाल युद्धविराम कायम है।

उन्होंने सप्ताहांत में अराघची की इस्लामाबाद, मस्कट और मॉस्को की संक्षिप्त यात्राओं के बारे में बात करते हुए कहा, ‘‘ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची वार्ता के दूसरे चरण के लिए अपनी टीम के साथ पाकिस्तान पहुंचे। उनके साथ महत्वपूर्ण बैठकें हुईं।’’

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ईरान ने मिडिल ईस्ट युद्ध शुरू होने के बाद से 21 लोगों को फांसी दी और 4,000 गिरफ्तार: यूएन

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में हमले शुरू होने के बाद से ईरान ने कम से कम 21 लोगों को फांसी दी है और 4,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में भारी तनाव देखने को मिला।

यूएन राइट्स के ऑफिस ने कहा, "अमेरिका-इजरायली हमलों की वजह से लड़ाई शुरू होने के बाद से जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में कम से कम नौ लोगों को फांसी दी गई है। इसके अलावा दस को विपक्षी समूह में कथित तौर पर शामिल होने के लिए और दो को जासूसी के आरोप में फांसी दी गई है।"

एजेंसी ने एक बयान में कहा, "28 फरवरी से अब तक ईरान में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों में 4,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।"

इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरान को नई चेतावनी दी है। ट्रंप ने दावा किया, “ईरान अपने काम को ठीक से नहीं कर पा रहा है। जल्द ही होशियार हो जाओ। उन्हें नहीं पता कि नॉन-न्यूक्लियर डील पर साइन कैसे करना है।”

वहीं, होर्मुज संकट के बीच तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों को ईरानी बंदरगाहों की लंबी नाकाबंदी के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से मंगलवार देर रात रिपोर्ट दी कि ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाली शिपिंग को रोककर उसकी अर्थव्यवस्था और तेल एक्सपोर्ट को दबाना जारी रखने का फैसला किया है।

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रूस इस बार विजय दिवस परेड में सैन्य साजो-सामान का प्रदर्शन नहीं करेगा

नाजी जर्मनी की हार की 81वीं वर्षगांठ पर रूस में होने वाली पारंपरिक विजय परेड में इस साल सैन्य साजो सामान का प्रदर्शन नहीं होगा। रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

यह 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने के बाद पहली बार होगा जब नौ मई को मास्को के रेड स्क्वायर पर सैन्य साजो सामान का प्रदर्शन नहीं होगा। यह दिन रूस के लिए उत्सव के समान होता है, जब वह अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करता है।

मंत्रालय के बयान में सैन्य साजो सामान के काफिले और कैडेट को परेड से बाहर रखने का कारण ‘‘वर्तमान अभियानगत स्थिति’’ बताया गया है। बयान में इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।

मंत्रालय ने बताया कि परेड में ‘‘विभिन्न उच्च सैन्य शिक्षण संस्थानों के कैडेट और रूसी सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं के कुछ सैनिक’’ शामिल होंगे। इसके साथ ही पारंपरिक सैन्य विमानों की उड़ानें भी होंगी।

पिछले साल की परेड रूस द्वारा यूक्रेन में सेना भेजे जाने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी परेड थी, जिसमें कई देशों के नेता मास्को पहुंचे थे। इनमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको जैसे प्रमुख अतिथि शामिल थे।

पिछले साल की परेड में 11,500 से अधिक सैनिक शामिल थे और 180 से ज्यादा सैन्य वाहन प्रदर्शित किए गए थे। इनमें टैंक, बख्तरबंद सैन्य वाहन और तोपखाने शामिल थे, जिनका यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा यार्स परमाणु-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और ड्रोन भी प्रदर्शित किए गए थे। रेड स्क्वायर के ऊपर लड़ाकू विमानों ने भी उड़ान भरी थी।

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लेबनान में हिजबुल्ला की सुरंगें तबाह, अब ड्रोन खतरे का अंत करेंगे: नेतन्याहू

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि लेबनान में हिजबुल्ला के सुरंग नेटवर्क को नष्ट करने के बाद अब ड्रोन खतरे को समाप्त करना अगला लक्ष्य है।

नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला की सुरंगों को नष्ट करने के बाद कहा कि "हमारा काम अभी खत्म नहीं हुआ है।"

उन्होंने कहा, "मैंने कुछ सप्ताह पहले ड्रोन हमलों को समाप्त करने के लिए एक विशेष परियोजना के निर्देश दिए थे। इसमें समय लगेगा.. लेकिन हम इसे भी समाप्त कर देंगे।"

इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के कथित सुरंग नेटवर्क को नष्ट कर दिया।

मंगलवार देर रात सेना ने कंतारा में एक बड़ा विस्फोट किया और इजराइल के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कहा कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसे "भूकंपीय घटना" के रूप में दर्ज किया गया।

इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बताया कि सेना को गाजा की तर्ज पर हिजबुल्ला ढांचे को नष्ट करने के निर्देश दिया गया है।

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