पाकिस्तान के मौसम विभाग (पीएमडी) ने कहा है कि ईरान में हुए हवाई हमलों के बाद वहां से उठने वाला धुआं और प्रदूषण पाकिस्तान की हवा को भी खराब कर सकता है।
विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर पाकिस्तान के मेट डिपार्टमेंट ने वीकली वेदर आउटलुक (10 मार्च से 16 मार्च 2026) में इसकी जानकारी दी है। एक्स पर एक नोट के साथ चेतावनी दी है। लिखा है कि ईरान के हालात की वजह से, हवाएं प्रदूषक तत्व ले जा सकती हैं, और पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्सों में वायु गुणवत्ता खराब हो सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक, ईरान से आने वाली हवाएं प्रदूषण को पाकिस्तान के पश्चिमी इलाकों तक ला सकती हैं। इससे वहां की हवा की क्वालिटी खराब हो सकती है। पीएमडी ने यह भी बताया कि पश्चिमी पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में 12 मार्च तक बारिश, तेज हवाएं और गरज के साथ तूफान आ सकता है।
पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, इसलिए ईरान में होने वाली घटनाओं का असर पाकिस्तान पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तान का पश्चिमी पड़ोसी ईरान, अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है। 28 फरवरी को इजरायल पर हवाई हमले हुए जिसमें उनके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी।
7 मार्च को तेहरान की रिफाइनरियों और फ्यूल डिपो पर बड़े हवाई हमलों ने राजधानी तेहरान को जहरीले अंधेरे में डुबो दिया था। इसके बाद रविवार को काली, तैलीय बारिश हुई थी। तेहरान में, तेल की जगहों से निकलने वाले घने काले धुएं ने सूरज को ढक लिया था।
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पश्चिम एशिया में जारी हमलों के बीच इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों की वजह से पिछले 24 घंटों में 191 लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, फ्रांस में इजरायल के राजदूत जोशुआ जर्का ने कहा कि ईरान के खिलाफ इस युद्ध में हम अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए तय समय से आगे चल रहे हैं।
द टाइम्स ऑफ इजरायल की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, जिन घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उनमें इजरायली सैनिक और आम लोग दोनों शामिल हैं। इनमें से कम से कम एक व्यक्ति की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और तीन गंभीर स्थिति में हैं।
इसके अलावा, 172 घायलों की हालत में सुधार हो रहा है। दस लोगों का मानसिक विकार का इलाज किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से 2,339 लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 95 अभी हॉस्पिटल में हैं।
हॉस्पिटल में भर्ती लोगों में से एक की हालत बहुत गंभीर बताई गई, जबकि 11 लोगों की हालत गंभीर है, 11 लोगों की हालत में सुधार हो रहा है और 69 की हालत ठीक है।
फ्रांस में इजरायल के राजदूत जोशुआ जर्का ने कहा कि इजरायल ईरान में अपने युद्ध के मकसद को पाने में तय समय से आगे है। इजरायल का मकसद ईरान में सरकार को कमजोर करना है ताकि ईरानी लोग अपनी किस्मत खुद तय कर सकें।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब ईरान पर अमेरिकी-इजराइली हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा व्यवधान उत्पन्न हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है।
क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव के अनुसार, दोनों नेताओं ने टेलीफोन पर एक घंटे तक हुई बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तथा रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर चर्चा की।
उशाकोव ने कहा, ‘‘चर्चा ईरान संघर्ष और यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के उद्देश्य से मॉस्को, वाशिंगटन और कीव के बीच चल रही त्रिपक्षीय वार्ता पर केंद्रित थी। दोनों राष्ट्रपतियों के बीच संवाद व्यावहारिक और रचनात्मक था।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान में जारी संघर्ष को लेकर भी अपने विचार साझा किए और ट्रंप को खाड़ी देशों के नेताओं और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के साथ पिछले सप्ताह हुई अपनी बातचीत के बारे में जानकारी दी।
उशाकोव ने कहा, ‘‘ट्रंप ने भी इस स्थिति पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने इस मुद्दे पर काफी सार्थक चर्चा की।’’
रूसी राष्ट्रपति द्वारा ऊर्जा अधिकारियों की एक शीर्ष बैठक बुलाने और यह घोषणा करने के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने पुतिन को फोन किया कि मॉस्को अपने मित्र देशों (भारत और चीन) के लिए एक विश्वसनीय भागीदार है और यदि यूरोपीय संघ प्रतिबंध हटाने को तैयार है तो रूस दीर्घकालिक आधार पर आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।
पुतिन ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से वैश्विक तेल और गैस प्रवाह में गंभीर रूप से बाधा उत्पन्न होने का खतरा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से, क्योंकि ये एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
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भारत ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का ‘‘स्पष्ट उल्लंघन’’ करार दिया और कहा है कि रमजान के दौरान नागरिकों की जान लेने वाले हमले करते समय इस्लामी एकजुटता का आह्वान करना ‘‘पाखंड’’ है।
सोमवार को अफगानिस्तान की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुपालन और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के आह्वान के प्रति नयी दिल्ली के समर्थन को दोहराया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत अफगानिस्तान की धरती पर हुए हवाई हमलों की कड़ी निंदा करता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देश की संप्रभुता के सिद्धांत का घोर उल्लंघन हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक ओर अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता के उच्च सिद्धांतों का समर्थन करना और दूसरी ओर रमजान के पवित्र महीने के दौरान बर्बर हवाई हमले करना पाखंड है। इन हमलों में छह मार्च तक 185 निर्दोष नागरिक मारे गए हैं।’’
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) के अनुसार, मारे गए 185 लोगों में से लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं, और हमलों के कारण 100,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
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अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों के बाद ईरान के कुछ हिस्सों में काले रंग की बारिश होने की खबरें आई हैं। मीडिया की कुछ खबरों में इसे “अम्लीय बारिश” कहा गया है।
ईरानी नागरिकों ने सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई होने और इमारतों एवं वाहनों पर तेल मिश्रित पानी गिरने की शिकायतें की हैं। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी दी है कि इस बारिश में मौजूद रासायनिक यौगिक अत्यंत खतरनाक और अम्लीय हो सकते हैं।
एक वायुमंडलीय रसायन विशेषज्ञ और रासायनिक इंजीनियर के अनुसार, यह बारिश केवल अम्लीय नहीं है। इसमें सल्फ़्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल तो होंगे ही, साथ ही अन्य कई हानिकारक रसायन भी मिल सकते हैं। ये प्रदूषक मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए तत्काल और दीर्घकालिक रूप से खतरनाक हैं।
तेल डिपो पर हमलों से उठे धुएँ में हाइड्रोकार्बन, अल्ट्राफाइन कण (पीएम2.5), पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएचएस) और भारी धातुएँ शामिल हो सकती हैं। इन प्रदूषकों के बारिश में मिलने से यह और भी हानिकारक हो जाती है।
धुएं में सल्फ़र डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड भी होते हैं, जो वायुमंडल में सल्फ़्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। यही अम्ल पानी की बूँदों में घुलकर परंपरागत “अम्लीय बारिश” बनाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश सामान्य अम्लीय बारिश से कहीं अधिक खतरनाक है, क्योंकि इसमें कई विषाक्त और कैंसरकारी तत्व शामिल हैं।
स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव गंभीर हो सकते हैं। तुरंत प्रभाव में लोग सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई और अस्थमा जैसी परेशानियों का सामना कर सकते हैं। विशेषकर वृद्ध, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और असमर्थ लोग अधिक जोखिम में हैं।
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