
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को सभी तटस्थ जहाजों को सलाह दी कि वे तुरंत ईरान के बंदरगाहों से निकल जाएं या अगर उनका अगला पड़ाव ईरान है तो वहां जाने की यात्रा रोक दें। यह जानकारी वीएचएफ रेडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर सामने आई।
सिन्हुआ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद एक व्यापारी जहाज के चालक दल के एक सदस्य ने सिन्हुआ को सार्वजनिक समुद्री रेडियो चैनल की रिकॉर्डिंग दी। इसमें अमेरिकी सेना आसपास मौजूद जहाजों को यह संदेश देती सुनाई दे रही है।
संदेश में कहा गया, "सभी तटस्थ जहाजों को सलाह दी जाती है कि वे तुरंत ईरानी बंदरगाहों से निकल जाएं और अगर उनका अगला गंतव्य ईरान है तो वहां जाने की यात्रा रोक दें।"
अमेरिकी सेना ने कहा कि नाकाबंदी लागू होने के बाद यह नियम सभी जहाजों पर लागू है, चाहे वे किसी भी देश के झंडे के तहत चल रहे हों या किसी भी तरह का सामान ले जा रहे हों।
रिकॉर्डिंग के मुताबिक, जो जहाज ईरान के किसी बंदरगाह की ओर जा रहे होंगे या वहां से निकल रहे होंगे, उन्हें रोका जा सकता है और जब्त भी किया जा सकता है।
संदेश में कहा गया कि अगर कोई जहाज मानवीय सहायता का सामान ले जा रहा है और उसे छूट चाहिए तो इसके लिए अमेरिकी सेना से पहले अनुमति लेनी होगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि जो जहाज इस नाकाबंदी का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ बल प्रयोग किया जा सकता है।
अमेरिका के नेतृत्व वाले जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर ने सोमवार को कहा था कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) मंगलवार को रात 20:00 यूटीसी से ईरान के सभी बंदरगाहों और उसके पूरे तटीय इलाके पर समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू करेगा।
सिन्हुआ को मिली एक दूसरी रेडियो रिकॉर्डिंग में अमेरिकी सेना ने कहा कि भले ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद घोषित किया है, लेकिन अमेरिकी बल समुद्री रास्तों को खुला रखने और कानूनी व्यापार की सुरक्षा के लिए तैयार हैं। होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी रास्ता अभी भी खुला है।
अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद से कारोबारी जहाज मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट के दो रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें एक उत्तरी रास्ता है, जो ईरान के नियंत्रण में है, और दूसरा दक्षिणी रास्ता, जो ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास से गुजरता है। इस दक्षिणी रास्ते पर अमेरिकी सेना जहाजों को सुरक्षित आवाजाही में मदद देती है।
ईरान ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट में क्रूज मिसाइलों से संयुक्त अरब अमीरात के दो टैकरों को निशाना बनाया, जिसमें एक भारतीय चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई और छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक घायल हो गए। इस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने डिप्टी चीफ ऑफ मिशन (डीसीएम) मोहम्मद जवाद होसैनी समेत ईरान के राजनयिकों को तलब किया।
दरअसल ओमान के क्षेत्रीय जल में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे यूएई के दो तेल टैंकर—'मोम्बासा' और 'अल बहियाह' जब दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे, उस समय ईरान की ओर से दो क्रूज मिसाइल दागी गईं।
संयुक्त अरब अमीरात में स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मिसाइल हमले में भारतीय नाविक की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि वह पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। हम घायलों तथा उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं।
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमले में दोनों टैंकरों में आग लगने से उन्हें नुकसान भी हुआ। आग पर काबू पा लिया गया है। मंत्रालय ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया। उसने कहा कि इस घटना से क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को खतरा पैदा हुआ है।
मंत्रालय के अनुसार, यूएई को बढ़ते तनाव के मद्देनजर उचित जवाब देने का पूरा अधिकार है और वह अपने क्षेत्र, नागरिकों, निवासियों, राष्ट्रीय हितों तथा रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि वह किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करने तथा अफवाहों या अपुष्ट सूचनाओं को साझा नहीं करने की अपील की। एक अलग बयान में यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी हमले की कड़ी निंदा की।
पाकिस्तान में मानसून बाढ़ का मौसम शुरू होने के साथ ही स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में बाढ़ की अधूरी तैयारी को लेकर चिंता जताई गई है। इस देरी के पीछे देश के मौजूदा वित्तीय संकट को एक बड़ा कारण बताया गया है।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया, "संभावित बाढ़ से निपटने के लिए ठोस उपाय अभी पूरे नहीं हुए हैं। चल रहे वित्तीय संकट के कारण मॉनसून की तैयारी के लिए जरूरी फंड भी जारी नहीं किए गए हैं।"
रिपोर्ट के अनुसार, रावलपिंडी में कई नालों से गाद नहीं निकाली गई है और लेह नाला इलाके में कई लोगों को कुछ समय के लिए दूसरी जगह भेज दिया गया। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों ने अपना कीमती सामान सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया है।
इसमें यह भी बताया गया है कि जिन बिल्डिंग और दुकानों की छतें टपक रही हैं और दीवारें कमजोर हैं, उन्हें खाली करने के लिए लगातार नोटिस जारी होने के बाद भी खाली नहीं किया जाता है। हर मॉनसून में एक या दो बिल्डिंग थोड़ी या पूरी तरह से गिर जाती हैं और नोटिस सिर्फ ऐसी घटनाओं के लिए कार्रवाई के सबूत के तौर पर जारी किए जाते हैं।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने कहा, "खाली करने के नोटिस से जुड़े मामले कोर्ट में भी पेंडिंग हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, किराएदारों के साथ कथित मिलीभगत की वजह से सरकार उन पर असरदार तरीके से कार्रवाई नहीं करती है, जिससे बार-बार मामले टलते हैं।"
इस बीच, स्थानीय मीडिया ने बताया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में भारी बारिश से आई अचानक बाढ़ से बहुत ज्यादा तबाही हुई है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, गिलगित-बाल्टिस्तान डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (जीबीडीएमए) ने कहा कि सोमवार सुबह डायमर में छह जगहों पर अचानक बाढ़ आई।
कई घरों और काराकोरम हाईवे (केकेएच) के साथ-साथ फसलें, खेती की जमीन और सरकारी और प्राइवेट प्रॉपर्टी को नुकसान हुआ।
थोर वैली में ट्रैफिक पूरी तरह से रोक दिया गया क्योंकि कई जगहों पर मेन रोड बह गई थी। हजारों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पावर ट्रांसमिशन लाइनें डैमेज हो गई और बाढ़ का मलबा कई घरों में घुस गया है।
खानबारी में आई भयानक बाढ़ में पूरे घर, उनके सामान के साथ-साथ जानवरों के भी बह जाने की खबर सामने आई।
रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर एक के बाद एक दस मिसाइलें दागकर तबाही मचाई। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के अनुसार, सोमवार रात रूस ने 135 ड्रोन और मिसाइलों से कई शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। हमले में कई लोग घायल हुए और रिहायशी इमारतों समेत बिजली और रेलवे सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''सोमवार रात रूस ने हमारे शहरों और बस्तियों पर 135 ड्रोन और अलग-अलग तरह की दस मिसाइलों से हमला किया। इनमें ज्यादातर बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। खार्कीव क्षेत्र में एक बच्चे समेत सात लोग घायल हुए। आम रिहायशी इमारतों, एक पेट्रोल पंप और रेलवे के ढांचे को नुकसान पहुंचा।"
जेलेंस्की ने बताया कि चेर्निहिव क्षेत्र में भी तीन लोग घायल हुए। रूस के हमले में एक रिहायशी इमारत और बिजली सप्लाई से जुड़ी सुविधाएं क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे हजारों घरों की बिजली चली गई। मरम्मत करने वाली टीमें बिजली जल्द से जल्द बहाल करने में लगी हुई हैं। जापोरिज्जिया में भी एक अपार्टमेंट बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि रूस ने कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। राजधानी में 16 जगहों को नुकसान पहुंचा, जिनमें एक सामान्य स्कूल और एक कारोबारी प्रतिष्ठान भी शामिल है।
इसके अलावा, द्नीप्रो, दोनेत्स्क, झितोमिर और ओडेसा क्षेत्रों के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया गया।
उन्होंने कहा कि रूस पर और ज्यादा दबाव डालना जरूरी है। अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। यूरोपीय संघ का 21वां प्रतिबंध पैकेज इसी हफ्ते मंजूर होना चाहिए। प्रतिबंधों पर फैसला लेने में हर दिन की देरी रूस को उसकी तैयारी के लिए और समय देती है।
जेलेंस्की ने कहा कि हर वह चीज जिसे रूस इस युद्ध को लंबा खींचने और लोगों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल करता है, उसे रोकना होगा।
उन्होंने कहा कि यूरोप की एंटी-बैलिस्टिक सुरक्षा क्षमता को लेकर हमारे साझेदारों के साथ हुए समझौते हमारे लोगों की सुरक्षा को सच में मजबूत बना सकते हैं। हमें मिलकर आगे बढ़ना होगा।
अमेरिका ने मंगलवार तड़के ईरान पर हवाई हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी फिर से लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की घोषणा के कुछ घंटे बाद ये हमले किये गए।
अमेरिकी सैन्य हमले के जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगियों पर हमला कर पलटवार किया।
इन कार्रवाइयों से उस अंतरिम समझौते पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जिसका उद्देश्य संघर्ष को रोकना, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलना और वार्ताकारों को युद्ध के स्थायी अंत के लिए तौर-तरीके तय करने का समय देना था।
इसके बजाय, क्षेत्र में एक बार फिर संघर्ष भड़क उठा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडराने लगा है। यदि जल्द ही कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह स्थिति एक व्यापक युद्ध में बदल सकती है।
अब इस संघर्ष का मुख्य केंद्र यह (होर्मुज) जलडमरूमध्य बन गया है, जहां से सामान्य दिनों में दुनिया के कुल व्यापार होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पांचवां हिस्सा गुज़रता था।
अंतरिम समझौते का उद्देश्य इस जलमार्ग को फिर से खोलना था, लेकिन ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कुछ जहाजों पर हमले किए हैं।
अमेरिका ने अब बलपूर्वक इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की धमकी दी है—लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए एक बहुत बड़े नौसैनिक बेड़े की आवश्यकता होगी, और यदि ऐसा नहीं हुआ तो ईरानी धरती पर हजारों अमेरिकी सैनिकों को उतारना पड़ेगा। हालांकि, यह भी संभव है कि ट्रम्प अपने कदम पीछे खींच लें, जैसा कि उन्होंने पहले भी किया है।
अमेरिकी सेना की मध्य कमान ने कहा कि उसने ईरान के कई इलाकों में हमले किए हैं। इन हमलों में ‘तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा समुद्री क्षमताओं’’ को निशाना बनाया गया।
ईरान ने इन हमलों की पुष्टि तो की है, लेकिन फिलहाल हताहतों की संख्या या नुकसान का कोई आकलन जारी नहीं किया।
अमेरिकी सेना ने कहा, "ये हमले ईरानी बलों को भारी नुकसान पहुंचाना जारी रखेंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्दोष नागरिकों तथा व्यावसायिक जहाजों पर हमला करने की उनकी क्षमता को कमज़ोर कर देंगे।"
अमेरिकी सेना द्वारा नए हमलों की घोषणा के कुछ ही क्षण बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘एक और बड़ा हमला’ बताया और कहा कि अमेरिका ‘‘नाकेबंदी फिर से लागू कर रहा है।’’
इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और उन तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजर रहे थे।
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