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दुनिया की खबरें: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव, बंदर अब्बास पोर्ट सिटी के तटीय इलाकों में हुए धमाके

ईरान की समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, ये आवाजें स्थानीय समय के अनुसार करीब दोपहर 2 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे) शहर के दक्षिणी तट के आसपास सुनी गईं। माना जा रहा है कि ये धमाके खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्‍ट्रेट के कुछ हिस्सों में हुई गोलीबारी या सैन्य कार्रवाई के कारण हुए।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट सिटी के तटीय इलाकों में गुरुवार दोपहर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान की समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, ये आवाजें स्थानीय समय के अनुसार करीब दोपहर 2 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे) शहर के दक्षिणी तट के आसपास सुनी गईं। माना जा रहा है कि ये धमाके खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्‍ट्रेट के कुछ हिस्सों में हुई गोलीबारी या सैन्य कार्रवाई के कारण हुए।

इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि गुरुवार सुबह अमेरिका के हमले में खुजेस्तान प्रांत के उसके तीन सैनिक मारे गए।

वहीं, बहरीन और कुवैत ने गुरुवार को बताया कि उनके हवाई रक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से किए गए हवाई हमलों को रोक दिया और उन्हें नष्ट कर दिया।

बहरीन डिफेंस फोर्स (बीडीएफ) ने एक बयान में कहा कि ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों के जरिए आम नागरिकों को निशाना बनाना जारी रखा है। उसने इसे देश के खिलाफ एक 'लगातार शत्रुतापूर्ण रवैया' बताया।

बीडीएफ ने कहा कि उसकी सभी सैन्य इकाइयां देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे हमलों के बाद मिले किसी भी अनजान या संदिग्ध सामान के पास न जाएं और उसे हाथ न लगाएं।

बहरीन ने कहा कि आम लोगों और निजी संपत्ति को निशाना बनाने के लिए मिसाइल और ड्रोन का जानबूझकर इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है।

उधर, कुवैत की सशस्त्र सेनाओं के जनरल स्टाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर बताया कि सेना ने तड़के तीन बैलिस्टिक मिसाइल, एक क्रूज मिसाइल और दस ड्रोन को रोक दिया। हालांकि, इनके मलबे से कई जगहों पर नुकसान हुआ और एक व्यक्ति घायल हुआ, जिसकी हालत स्थिर बताई गई है।

गुरुवार सुबह पूरे कुवैत में हवाई हमले के सायरन बजाए गए। हमलों के दौरान गिरे मलबे को हटाने के लिए विस्फोटक निष्क्रिय करने वाली टीमें तैनात की गईं।

इसके अलावा, कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए उन्हें कुवैत की संप्रभुता का 'खुला उल्लंघन', उसकी सुरक्षा और स्थिरता के लिए 'सीधा खतरा' और अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया।

इससे पहले अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसकी सेनाओं ने ईरान की होर्मुज स्‍ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की क्षमता को कम करने के लिए एक और दौर के हमले पूरे किए हैं। यह लगातार दूसरे दिन की गई ऐसी कार्रवाई थी।

दक्षिण चीन के क्वांगशी में आई बाढ़ में 39 लोगों की मौत

दक्षिण चीन के क्वांगशी चुआंग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी नाननिंग में आयोजित एक न्यूज ब्रीफिंग से मिली खबर के अनुसार, नाननिंग के ल्यूलान जलाशय बांध के टूटने समेत इस दौर की बाढ़ में क्यांगशी में कुल 39 लोगों की मौत हो गई और 9 लोग लापता है। क्योंकि कुछ मृतकों की पहचान की तकनीकी पुष्टि के लिए समय लगेगा, मृतकों और लापता व्यक्तियों की संख्या शायद दोहरी होने की आशंका है।

नाननिंग शहर के उपमहापौर तिंग वेइ ने बताया कि ल्यूलान जलाशय का बांध टूटने से 26 लोगों की मौत हो चुकी है और सात लोग लापता है। 9 जुलाई की सुबह 11 बजे तक नाननिंग शहर में कुल 64 हजार 500 लोग स्थानांतरित किए गए।

परिचय के अनुसार, नाननिंग शहर ने प्राकृतिक आपदा राहत की तीसरी श्रेणी वाली आपात प्रतिक्रिया को दूसरी श्रेणी की आपात प्रतिक्रिया तक उन्नत की है और प्रभावित लोगों को जरूरी वस्तुएं प्रदान की हैं।

बताया गया है कि अब ल्यूलान जलाशय का जल स्तर बांध की आधार चट्टान के नीचे हो गया है और अन्य जलाशयों की स्थिर स्थिति है। बचाव और राहत कार्य व्यवस्थित रूप से चल रहा है।

जेलेंस्की के फैसले से नाराज पोलैंड, यूरोपीय संसद ने भी उठाए सवाल

यूरोपीय संसद ने एक संशोधन को मंजूरी दी है, जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के उस फैसले की आलोचना की गई है, जिसके तहत एक खास यूक्रेनी सैन्य यूनिट का नाम दूसरे विश्व युद्ध के दौर की 'यूक्रेनी इंसर्जेंट आर्मी' (यूपीए) के नाम पर रखा गया था। इस फैसले ने पोलैंड और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक विवाद पैदा कर दिया है।

यूरो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संसद के ज्यादातर सदस्यों ने इस संशोधन के पक्ष में मतदान किया। इसमें जेलेंस्की के इस कदम को 'हाल का अनावश्यक और बिना वजह किया गया तनाव बढ़ाने वाला फैसला' बताया गया। साथ ही, इसमें रूस के सैन्य हमले के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में पोलैंड के समर्थन का भी जिक्र किया गया।

यूरोपीय पीपुल्स पार्टी से जुड़े पोलिश सांसद आंद्रेज हालिकी और उनके जर्मन सहयोगी माइकल गेहलर ने यह संशोधन पेश किया था। इसे यूक्रेन के यूरोपीय संघ (ईयू) में शामिल होने की प्रक्रिया पर तैयार की गई एक रिपोर्ट में शामिल किया गया।

यूक्रेन में यूपीए को सोवियत शासन का विरोध करने और यूक्रेन की आजादी के लिए लड़ने वाले संगठन के रूप में देखा जाता है। वहीं, पोलैंड में इसे 1943-45 के वोलिन नरसंहार से जोड़ा जाता है, जिसमें नाजी कब्जे के दौरान हजारों पोलिश लोगों की मौत हुई थी। पोलैंड इसे नरसंहार मानता है, जबकि यूक्रेन इस बात से सहमत नहीं है।

यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में जेलेंस्की के फैसले पर नाराजगी जताई गई और कहा गया कि इससे यूपीए से जुड़े उन हजारों पीड़ितों और उनके परिवारों की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया है, जिनका पोलैंड में गहरा सम्मान किया जाता है।

प्रस्ताव में कहा गया कि यह कदम पड़ोसी देशों के रिश्तों को प्रभावित करता है और यूरोपीय मूल्यों के अनुरूप नहीं है। इसमें यूक्रेन और पोलैंड से तनाव कम करने और आपसी सुलह की दिशा में काम करने की अपील की गई।

जेलेंस्की के इस फैसले के बाद पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नॉवरोकी ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल' वापस ले लिया। यह सम्मान जेलेंस्की को 2023 में दिया गया था।

चीन ने अमेरिका से कहा, तिब्बत की आजादी का समर्थन न करें

चीन ने बृहस्पतिवार को अमेरिका से कहा कि वह तिब्बत को चीन का हिस्सा मानने और क्षेत्र की आजादी का समर्थन न करने के अपने वादे का सम्मान करे।

बीजिंग की यह टिप्पणी अमेरिकी विदेश विभाग की ओर बुधवार को जारी उस बयान के मद्देनजर आई है, जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन अपनी संस्कृति को बचाए रखने की तिब्बतियों की इच्छा का समर्थन करता है। बयान में चीन से दलाई लामा के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान भी किया गया था।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने यहां एक प्रेस वार्ता में अमेरिका के बयान के बारे में पूछे जाने पर कहा कि तिब्बत से जुड़े सभी मुद्दे चीन के "आंतरिक मामले" हैं।

निंग ने कहा, "शिजांग से जुड़े मुद्दे पूरी तरह से चीन के आंतरिक मामले हैं। किसी भी देश को इनमें दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।" चीन तिब्बत को 'शिजांग' कहता है।

निंग ने कहा, "हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अपने उस वादे का सम्मान करे, जिसके तहत वह मानता है कि शिजांग चीन का हिस्सा है और वह "तिब्बत की आजादी" का समर्थन नहीं करता है। हम अमेरिका से यह भी आग्रह करते हैं कि वह शिजांग से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल करके चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करे।"

हालांकि, उन्होंने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के साथ बातचीत करने की अमेरिका की अपील पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

छह जुलाई 1935 को तिब्बत के अमदो इलाके के तक्तसेर गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे 14वें दलाई लामा 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद भारत के धर्मशाला में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। उन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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