
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण में लगी बड़ी जंगल की आग का असर अब आवाजाही पर भी हो रहा है। आग की वजह से इलाके में सड़कें बंद कर दी गई हैं। इसके साथ ही आस-पास के शहरों को खाली करने के आदेश दिए गए हैं। हालात का आकलन करते हुए इसकी तैयारी पहले ही कर ली गई थी।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के डिपार्टमेंट ऑफ फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज (डीएफईएस) ने शुक्रवार सुबह जारी एक अलर्ट जारी कर कहा कि राज्य के दक्षिणी कोस्ट पर पर्थ से 420 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में फिट्जगेराल्ड रिवर नेशनल पार्क में लगी आग से जान और घरों को खतरा है।
लगभग 2,000 की आबादी वाले रेवेन्सथोर्प सहित आस-पास के कई शहरों के रहने वालों और आने-जाने वालों को आदेश दिया गया है कि अगर रास्ता साफ है तो वे वहां से निकल जाएं। डीएफईएस के अलर्ट में कहा गया, "आप खतरे में हैं और बचने के लिए तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है।"
इसके साथ ही जो लोग रुकना चाहते हैं, उन्हें बहुत ज्यादा गर्मी के खतरे की वजह से घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है। यह आग 16 जनवरी को नेशनल पार्क में बिजली गिरने से लगी थी और शुक्रवार सुबह तक 60,000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन जल चुकी थी।
रेवेन्सथोर्प के पश्चिम में एक मेन हाईवे बंद कर दिया गया है, और उत्तर में न्यूडेगेट शहर में एक इवैक्यूएशन सेंटर खोला गया है। फिट्जगेराल्ड रिवर नेशनल पार्क की झाड़ियों में लगी आग शुक्रवार सुबह दक्षिण-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में लगी चार बड़ी आग में से एक थी।
पर्थ से करीब 120 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में बसे चार छोटे शहरों के करीब 1,500 लोगों को खाली करने के आदेश जारी किए गए हैं। जंगल में लगी आग बेकाबू होकर उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ रही है। इसी वजह से लोगों को इन शहरों को खाली करने के लिए कहा गया है।
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बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले हिंसा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एक तरफ अल्पसंख्यकों के खिलाफ आपराधिक मामले बढ़ते जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हिंसा में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
ताजा मामले में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक नेता को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। इस घटना में बीएनपी नेता गंभीर रूप से घायल हो गए।
मीडिया के अनुसार, घटना राजधानी ढाका के केरानीगंज इलाके में गुरुवार की रात को हुई थी। पीड़ित की पहचान 45 साल के मोहम्मद हसन मोल्ला के तौर पर हुई है। वह केरानीगंज के हजरतपुर यूनियन में बीएनपी के महासचिव हैं।
बांग्लादेशी मीडिया ने बताया कि उन्हें गुरुवार रात करीब 11 बजे गंभीर हालत में ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में ले जाया गया। फिलहाल वहीं पर उनका इलाज चल रहा है।
हमले की पुष्टि करते हुए, ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पुलिस चौकी के इंचार्ज इंस्पेक्टर मोहम्मद फारुक ने कहा कि हसन मोल्ला नाम के एक बीएनपी नेता को केरानीगंज इलाके से गोली लगने के बाद हॉस्पिटल लाया गया था।
बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून ने फारुक के हवाले से कहा, "उनका इमरजेंसी डिपार्टमेंट में इलाज चल रहा है और उनके पेट के दाहिने हिस्से में गोली लगी है। मामले की रिपोर्ट संबंधित पुलिस स्टेशन को दे दी गई है।"
पीड़ित के भाई, रकीब मोल्ला ने बताया कि दो हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर घटना को अंजाम देने आए थे। दोनों हमलावरों ने केरानीगंज इलाके में हसन पर गोलियां चलाईं। हसन उस वक्त अपने घर लौट रहे थे।
रकीब ने बताया कि हमलावरों के मौके से भागते समय हसन के पेट के दाहिने हिस्से में गोली लगी। ढाका ट्रिब्यून ने रकीब के हवाले से कहा, “सूचना मिलने के बाद, हम मौके पर पहुंचे, मेरे भाई को बचाया और उसे ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में ले गए।”
यह ताजा घटना बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ती राजनीतिक हिंसा के बीच हुई है। इससे पहले पिछले हफ्ते, कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नेता 65 साल के अनवर उल्लाह की उनके घर पर हत्या कर दी गई थी।
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ईरान के शीर्ष अभियोजक ने शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को ‘पूरी तरह झूठा’ बताकर खारिज कर दिया कि देश भर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए 800 लोगों की फांसी उनके दखल देने की वजह से रुकी है।
ईरान की न्यायपालिका की समाचार एजेंसी ‘मिजान’ ने देश के शीर्ष अभियोजक मोहम्मद मोवाहेदी की टिप्पणी का हवाला दिया है।
इससे फिर सवाल उठता है कि क्या देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर बड़ी संख्या में लोगों को फांसी दी जाएगी? अधिकारियों ने पहले ही कहा है कि कुछ कैदियों पर ऐसे आरोप हैं जिनमें मौत की सजा दी जा सकती है।
‘मिजान’ के मुताबिक, मोवाहेदी ने कहा, “यह दावा पूरी तरह से झूठा है; ऐसी कोई संख्या उपलब्ध नहीं है, और न ही न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला लिया है।”
ट्रंप ने कहा है कि बड़े पैमाने पर फांसी देना और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारना, दोनों ही ईरान पर संभावित अमेरिकी सैन्य हमले के लिए ‘रेड लाइन’ (सीमारेखा) हैं।
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