
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक बार फिर कीव भीषण हमले की चपेट में आ गया। राजधानी कीव पर मिसाइलों और सैकड़ों ड्रोन से बड़ा हमला किया गया। इस हमले में कई लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए हैं। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान पहुंचा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि रविवार रात कीव पर रूस ने बहुत बड़ा हमला किया। रूस ने 68 मिसाइलें और 351 हमला करने वाले ड्रोन दागे। फिलहाल हमले के बाद राहत और बचाव का काम जारी है।
राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''शहर में 10 से ज्यादा जगहों पर नुकसान हुआ है, जिनमें रिहायशी इमारतें भी शामिल हैं। सभी जरूरी सेवाएं मौके पर मौजूद हैं और लोगों को बचाने और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए पूरी कोशिश कर रही हैं। अब तक 64 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, इस हमले में दुखद रूप से 11 लोगों की मौत हो गई है। मैं उनके परिवारों और प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। इसके अलावा, करीब 60 लोग घायल हुए हैं।''
जेलेंस्की ने बताया कि कीव क्षेत्र में 16 लोग घायल हुए हैं और तीन लोगों की जान गई है। मैं उनके परिवारों और प्रियजनों के प्रति भी अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। विश्नेव में मिसाइल हमले वाली जगह पर अभी भी आग लगी हुई है। वहां के निजी रिहायशी इलाके से लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। हमले के बाद की स्थिति संभालने के लिए 400 से ज्यादा बचावकर्मी और पुलिस अधिकारी काम कर रहे हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे सैनिकों ने ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने में अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन अफसोस की बात है कि वे रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सफल नहीं हो सके। इसकी मुख्य वजह इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी है।
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बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में सोमवार सुबह भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन हो गया। इस प्राकृतिक आपदा में महिलाओं और बच्चों समेत करीब 9 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 5 बच्चे भी शामिल हैं। अधिकांश हादसे रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में हुए।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उखिया उपजिला के अलग-अलग रोहिंग्या शिविरों में भूस्खलन से 8 लोगों की जान गई, जबकि कॉक्स बाजार नगर में एक अन्य व्यक्ति की मौत हुई।
बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक, द ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, सबसे बड़ा हादसा जामटोली कैंप-15 में हुआ, जहां पहाड़ी से मिट्टी खिसककर 44 वर्षीय मोहम्मद कमाल हुसैन के घर पर गिर गई। हादसे में कमाल हुसैन, उनकी 39 वर्षीय पत्नी हुमायरा बेगम और चार वर्षीय बेटे मोहम्मद अनस की मौत हो गई। वहीं, दो अन्य लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया गया।
एक अन्य घटना में कुतुपालोंग रोहिंग्या कैंप-7 में पहाड़ी ढहने से 7 वर्षीय एकराम की मौत हो गई। इसके कुछ घंटों बाद बालुखाली रोहिंग्या कैंप-11 में हुए भूस्खलन में चार लोगों की जान चली गई। मृतकों में 27 वर्षीय उम्मे हबीबा, 13 वर्षीय तंजीना अख्तर, 5 वर्षीय मोहम्मद रिहान और 3 वर्षीय हारुनुर रशीद शामिल हैं।
इसके अलावा, कॉक्स बाजार शहर के छत्तरघोना इलाके में हुए एक अन्य भूस्खलन में अली अकबरनामक व्यक्ति की मौत हो गई। हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्य मलबे में दब गए थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने अली अकबर को मृत घोषित कर दिया।
उखिया प्रशासन ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
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सूडान युद्ध में पिछले छह महीने के दौरान 300 से ज्यादा बच्चे मारे गए हैं या घायल हुए हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चे ड्रोन हमलों में हताहत हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने सोमवार को यह जानकारी दी।
सूडान अप्रैल 2023 से सेना और अर्द्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (आरएसएफ) के बीच युद्ध में उलझा हुआ है।
यूनिसेफ के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच लड़ाई अब मुख्य रूप से कोरडोफान, दारफुर और ब्लू नाइल राज्यों में केंद्रित हो गई है, जहां 60 फीसदी मृतकों की जान ड्रोन हमलों के कारण गई है।
संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों ने उत्तर कोरडोफान के रणनीतक रूप से अहम शहर अल-ओबेद पर कब्जे के लिए आरएसएफ और सेना में भीषण लड़ाई के बीच लोगों पर संभावित अत्याचारों को लेकर चिंता जताई है।
सोमवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित मानवाधिकार परिषद ने पांच यूरोपीय देशों की ओर से पेश उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसमें अल-ओबेद और उसके आसपास के क्षेत्रों में आरएसएफ और उसके सहयोगियों की बढ़ती हिंसा की निंदा की गई है।
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ईरान की राजधानी तेहरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में सोमवार को काले कपड़े पहने शोकाकुल लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। लोग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ नारे लगा रहे थे और ट्रंप मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे।
ईरान के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे खामेनेई (86) के ताबूत को एक ट्रक में रखा गया। इसी ट्रक में उनके परिजनों के ताबूत भी रखे गए जो 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में इजराइल और अमेरिका के हवाई हमले में मारे गए थे।
ईरान की धार्मिक सत्ता ने इस भारी जनसमूह को अपनी ताकत के प्रदर्शन के रूप में प्रोत्साहित किया। यह जुटान ऐसे समय में हुआ है, जब ईरान उस युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है, जिसमें खामेनेई की मौत हो गई थी।
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