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गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जरिए 10 हजार करोड़ की आयकर चोरी का घोटाला हुआ, चाणक्य कौन: कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अब ऐसा लगता है कि बीजेपी के संरक्षण में देश के भीतर ही काले धन को ‘सफेद’ करने की एक योजना चल रही है।

गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जरिए 10 हजार करोड़ की आयकर चोरी का घोटाला हुआ, चाणक्य कौन: कांग्रेस
गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जरिए 10 हजार करोड़ की आयकर चोरी का घोटाला हुआ, चाणक्य कौन: कांग्रेस फोटोः IANS

कांग्रेस ने बुधवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जरिए 10 हजार करोड़ रुपये की आयकर चोरी का ‘‘घोटाला’’ हुआ है और इसकी जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जानी चाहिए। आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूछा कि 3,260 ‘‘फर्जी राजनीतिक दलों’’ के पीछे का ‘‘चाणक्य’’ कौन है और कथित घोटाले का ‘‘असली मास्टरमाइंड’’ कौन है? उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री, आप विदेश से काला धन वापस लाने में नाकाम रहे और नागरिकों को अभी तक वादे के अनुसार 15-15 लाख रुपये नहीं मिले हैं। अब ऐसा लगता है कि बीजेपी के संरक्षण में देश के भीतर ही काले धन को ‘सफेद’ करने की एक योजना चल रही है।’’

रमेश ने पूछा कि फर्जी राजनीतिक दलों के ज़रिए कर चोरी और धनशोधन के मामले सामने आने के बावजूद, सरकार ने कथित कर चोरों और ऐसे दलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की।उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शक्तिसिंह गोहिल ने सरकार से सवाल किया था कि 3,260 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से जुड़े 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी के खुलासे के बावजूद दोषियों पर 200 प्रतिशत जुर्माना क्यों नहीं लगाया गया और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू क्यों नहीं की गई।

रमेश ने कहा, ‘‘हमें याद है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज़ कर दिए गए थे और उसे भारी-भरकम कर नोटिस भेजे गए थे। यह पार्टी को आर्थिक रूप से कमज़ोर करने के मकसद से उठाया गया एक बेहद अलोकतांत्रिक कदम था।’’

जयराम रमेश ने पूछा, ‘‘तो, इन 3,260 फर्जी राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े कर चोरी के मामलों की जांच क्यों नहीं हो रही है?’’ रमेश ने आरोप लगाया, ‘‘क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि इन धोखाधड़ी करने वाले दलों को भाजपा नेतृत्व का संरक्षण प्राप्त था और वे सरकार की मौन सहमति से ही इस पूरे घोटाले को अंजाम दे रही थे?’’

शक्तिसिंह गोहिल ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि देश में 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं जिनका इस्तेमाल आयकर से बचने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 80जीजीसी के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति आयकर के तौर पर देय राशि किसी राजनीतिक पार्टी को दान करता है, तो उसका कर शून्य हो जाता है; वहीं दूसरी धारा, 80जीजीडी के अनुसार, अगर कोई कंपनी अपने कर का पैसा किसी पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को दान करती है, तो उसका कर भी शून्य हो जाता है।

गोहिल ने आरोप लगाया, ‘‘अब घोटाला यह है कि इन 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये का चंदा इकट्ठा किया है।’’ उन्होंने कहा कि जब 2025 में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की रिपोर्ट आई, तो कार्रवाई करना सरकार की ज़िम्मेदारी था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

गोहिल ने कहा कि सरकार ने कहा था कि दोषी पाए गए लोगों को दिए जाने वाले चंदे को अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए और उन्हें उनसे कोई लाभ नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘जबकि कानून के मुताबिक, धोखाधड़ी करने वाली फर्जी कंपनियों पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाना चाहिए; उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने चाहिए और दोषी पाए जाने पर उन्हें सात साल की जेल होनी चाहिए। लेकिन इस मामले में, अभी तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि कर चोरी के घोटालों में सनदी लेखाकारों (चार्टर्ड अकाउंटेंट) की बड़ी भूमिका थी और आयकर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा था कि ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए। गोहिल ने कहा, ‘‘लेकिन ‘ऊपर’ से ऐसी किसी कार्रवाई का कोई आदेश नहीं आया है, क्योंकि ये उनकी अपनी ‘सी टीम’ है। आयकर अपील न्यायाधिकरण ने कहा है कि इस तरह की कर चोरी देश के लिए घातक है। यह काला धन देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को कमजोर करेगा।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार कार्रवाई से अपने ‘‘अपने लोगों’’ को बचा रही है। गोहिल ने कहा कि निर्वाचन आयोग के पास राजनीतिक कोष के संबंध में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर दिशा-निर्देश हैं और हर राज्य में चुनाव अधिकारी राजनीतिक दलों के चंदे तथा खर्च की जांच-पड़ताल के लिए ज़िम्मेदार हैं।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या निर्वाचन आयोग की ‘‘भाजपा के साथ मिलीभगत’’ है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के खिलाफ़ पहले कभी ऐसा सवाल नहीं उठा, क्योंकि यह एक स्वतंत्र संस्था है। गोहिल ने कहा, ‘‘पहले मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और भारत के प्रधान न्यायाधीश मिलकर करते थे।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘नरेन्द्र मोदी ने सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया से प्रधान न्यायाधीश को हटा दिया और उनकी जगह एक दूसरे केंद्रीय मंत्री, अमित शाह को शामिल कर लिया। अब, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह मिलकर सीईसी के तौर पर सिर्फ़ उन्हीं लोगों को नियुक्त करेंगे जो उनकी बात मानेंगे।’’

कांग्रेस की मांगों के बारे में गोहिल ने कहा कि कथित कर चोरी ‘‘घोटाले’’ की जांच जेपीसी से कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आयकर अधिनियम की धारा 270ए(9) और धारा 2ए के तहत 200 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाए। गोहिल ने यह भी मांग की कि कथित घोटाले में शामिल सनदी लेखाकारों के खिलाफ़ धारा 276सी (1) और 277 के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं तथा दोषी पाए जाने पर उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएं।

उन्होंने कथित फ़र्ज़ी राजनीतिक दलों के नेताओं के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज करने की भी मांग की। गोहिल ने कहा, ‘‘सरकार को चुनावों में दिए गए चंदे से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि आम लोग इसके बारे में जान सकें।’’ उन्होंने यह भी मांग की कि इस बात की जानकारी सार्वजनिक की जाए कि कथित फर्जी राजनीतिक दलों से जुड़े कितने लोग बाद में भाजपा में शामिल हुए।