
दिल्ली-एनसीआर पिछले आठ हफ्तों से लगातार जहरीली हवा झेल रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि नवंबर महीने में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 से नीचे आया हो। फिलहाल भी पूरे क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की जा रही है और आने वाले दिनों में राहत के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार AQI यदि 301 से 400 के बीच हो तो लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने पर सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। यही स्थिति पिछले कई हफ्तों से दिल्ली-एनसीआर में बनी हुई है।
शनिवार, 29 नवंबर 2025 की सुबह 6 बजे दर्ज किए गए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं-
दिल्ली: 344
गाजियाबाद: 340
नोएडा: 354
ग्रेटर नोएडा: 335
यह साफ दिखाता है कि एनसीआर में एक भी इलाका ऐसा नहीं है जहां लोग शुद्ध हवा में सांस ले पा रहे हों।
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मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान गिरने के साथ हवा की गति कम हो जाती है, जिससे प्रदूषक जमीन के पास ही जमने लगते हैं। ऐसे में AQI में और वृद्धि हो सकती है। हालांकि हवा की रफ्तार बढ़ती है तो हालात कुछ हद तक सुधर सकते हैं।
प्रदूषण का असर सिर्फ बुजुर्गों या पहले से बीमार लोगों पर ही नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ लोगों पर भी साफ दिख रहा है।
आंखों में लगातार जलन
गले में खराश और जलन
थोड़े से श्रम में ही सांस फूलना
सीने में भारीपन
ये लक्षण अब आम होते जा रहे हैं। कई लोग खुली हवा में कुछ मिनट रहने पर भी असहज महसूस कर रहे हैं।
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एनसीआर में GRAP-3 के तहत कई प्रतिबंध लागू हैं, परंतु इसके बावजूद एयर क्वालिटी में किसी बड़े सुधार के संकेत नहीं मिल रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण हर साल नवंबर-दिसंबर में भयावह रूप ले लेता है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
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