
असम में रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर असम सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून राज्य के लोगों की दिक्कतों को बढ़ाएगा और निजी जीवन में दखल और निगरानी को बढ़ाएगा।
अखिल गोगोई ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि यह प्रस्तावित विधेयक नौकरशाहों और अधिकारियों को अतिरिक्त शक्तियां प्रदान करेगा। जिससे वो आम लोगों की निजी जिंदगी, उनकी जीवन शैली यहां तक कि उनके अंतरंग पहलुओं से भी जुड़ी स्थितियों की निगरानी करेंगे। यह एक तरह से संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
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अखिल गोगोई ने यूसीसी से जुड़े विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि क्या राज्य सरकार नौकरशाहों का इस्तेमाल आम लोगों की निजी और उनके अंतरंग पहलुओं में ताकझांक के लिए करेगी? उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून से लगातार निगरानी की प्रक्रिया संस्थागत हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक से सरकारी जांच एजेंसियों के लिए आम लोगों की निजी जिंदगी में दखल देने का रास्ता तैयार होगा। इतना ही नहीं, स्थिति ऐसी हो जाएगी कि ब्यूरोक्रेसी से जुड़े लोग आपकी जासूसी करेंगे और यह भी पता लगा लेंगे कि आप अपनी निजी जिंदगी में क्या-क्या करते हैं। इससे आम लोगों की निजी जिंदगी में निगरानी बढ़ेगी। अब ऐसे में इस तरह की स्थिति को एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत कैसे स्वीकार किया जा सकता है?
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गोगोई ने तर्क दिया कि यह संविधान की आत्मा का उल्लंघन करती है। इसके इतर, सुप्रीम कोर्ट की ओर से निजता के अधिकार को लेकर आए फैसलों को भी नजरअंदाज करती है। उन्होंने कहा कि आखिर हमारा संविधान क्या कहता है और सुप्रीम कोर्ट ने लगातार क्या टिप्पणी की हैं? सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को स्पष्ट किया कि संसद या राज्य विधानसभा किसी भी सूरत में आम लोगों की निजी जिंदगी में दखल नहीं दे सकती है।
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उन्होंने असम की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य मशीनरी का इस्तेमाल करते हुए प्रशासन आम लोगों की जिंदगी को नियंत्रित करना चाहता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब इस तरह की स्थिति पैदा हो गई है कि नौकरशाह और पुलिस आम लोगों की निजी जिंदगी में दखल देंगे? उन्होंने इस प्रस्ताव को व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रहार बताया। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक में विवादित बिंदुओं को हटाया जाए। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में सभी लोगों को सरकारी हस्तक्षेप के बिना जीने की मंजूरी मिलनी चाहिए।
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