
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे को लेकर जारी विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की एसआईटी जांच चल रही है, लेकिन कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि बड़े पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है। अखिलेश ने चंपत राय का नाम लेते हुए कहा कि उनका जिक्र एसआईटी रिपोर्ट में नहीं है, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर उन्हें क्यों बचाया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है और उन्होंने समाज को मर्यादा में रहने का संदेश दिया था। लेकिन कुछ लोगों ने अपने निजी फायदे के लिए उसी मर्यादा का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में चढ़ावे की चोरी सबसे बड़ा पाप मानी जाती है और इस पूरे मामले ने करोड़ों सनातनियों की भावनाओं को आहत किया है। उनके मुताबिक अब तक यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि चढ़ावे में कितनी गड़बड़ी हुई, जबकि हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने दावा किया कि एक बड़े पद पर बैठे व्यक्ति पर पहले भी चंदे की नकली पर्चियां छपवाने का मामला सामने आ चुका है, हालांकि उन्होंने उस व्यक्ति का नाम नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे विवाद से देश की छवि को नुकसान पहुंचा है और इसका असर भारत में आने वाले विदेशी निवेश पर भी पड़ सकता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि इस मामले में कोषाध्यक्ष का नाम भी सामने आया है और सवाल उठाया कि उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि मंदिर परिसर से जुड़े एक व्यक्ति ने करीब 980 बार फोन किया था। उनका कहना था कि अगर वहां काम करने वाले सभी लोगों का कॉल रिकॉर्ड निकाला जाए तो ज्यादातर नंबर भाजपा से जुड़े लोगों के निकलेंगे।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि इन खुलासों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और कई लोग संपर्क साधने लगे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े मामले पर उनका खामोश रहना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।