
उत्तर प्रदेश में बढ़ते 'गन कल्चर' और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा है कि गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने वाले बाहुबलियों, दबंग नेताओं और प्रभावशाली लोगों को आखिर किस आधार पर हथियारों के लाइसेंस जारी किए गए। हाईकोर्ट ने इस मामले में कई चर्चित राजनीतिक और आपराधिक चेहरों का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिन लोगों का ब्यौरा मांगा है उनमें बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह, विनीत सिंह, अब्बास अंसारी, खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंगला, अतुल वर्मा, मोहम्मद साहब, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह, अनूप सिंह, लल्लू यादव, बच्चू यादव और जुगनू वालिया समेत 19 चर्चित नाम शामिल हैं। कोर्ट ने सरकार से इन सभी के पते, उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों, शस्त्र लाइसेंस और सरकारी सुरक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी पेश करने को कहा है।
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यह मामला संतकबीर नगर निवासी जयशंकर की ओर से दाखिल याचिका के बाद सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस जारी करने और उनके नवीनीकरण में नियमों की अनदेखी की जा रही है। सुनवाई जस्टिस विनोद दिवाकर की अदालत में हुई। जब राज्य सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया तो आंकड़े चौंकाने वाले निकले। सरकार के मुताबिक उत्तर प्रदेश में इस समय 10 लाख 8953 शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। इनमें 6062 ऐसे लोग हैं जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा 23,407 लाइसेंस लंबित हैं, जबकि 20,960 परिवारों के पास एक से ज्यादा हथियारों के लाइसेंस हैं।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लाइसेंसी हथियारों के खुले प्रदर्शन पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो और वीडियो पोस्ट करने का चलन लगातार बढ़ रहा है, जिससे समाज में गलत संदेश जा रहा है और गन कल्चर को बढ़ावा मिल रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा है कि ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई हुई और लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है।
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हाईकोर्ट ने सिर्फ हथियारों के लाइसेंस ही नहीं, बल्कि बाहुबलियों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को मिली सरकारी सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट जानना चाहता है कि गंभीर मुकदमों का सामना कर रहे लोगों को सरकारी सुरक्षा किस आधार पर दी गई और क्या हथियार तथा सुरक्षा दोनों साथ होने से कानून-व्यवस्था पर असर पड़ता है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस विभाग और सभी जिलों के अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जांच में नियमों के उल्लंघन या गलत जानकारी देकर लाइसेंस हासिल करने की बात सामने आती है तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है।
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