बिहार के दिवंगत कद्दावर नेता रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी में हंगामा जारी है। पार्टी पर वर्चस्व कायम रखने के लिए चाचा पारस और भतीजे चिराग गुट के बीच शह-मात के खेल में आज बागी गुट ने कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का दावा कर पशुपति कुमार पारस को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया। पारस गुट के नेताओं ने बताया कि इससे पहले पशुपति पारस ने अपना नामांकन दाखिल किया। फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पारस के नाम पर सभी सांसदों ने एकमत में सहमति जताई।
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खास बात ये है कि पारस गुट की यह बैठक बागी सांसदों द्वारा एलजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष और चुनाव प्रभारी बनाए गए सूरजभान सिंह के निजी आवास पर हुई। हालांकि एलजेपी कार्यालय में चुनावी प्रक्रिया नहीं करने पर सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी की अंदरूनी कलह को देखते हुए चुनाव प्रभारी सूरजभान के कंकड़बाग स्थित आवास पर बैठक आयोजित की गई।
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वहीं, पारस गुट का कहना है कि कोरोना को देखते हुए कार्यकारी अध्यक्ष के आवास पर बैठक बुलाई गई। पारस गुट का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ इकट्ठे न हो, इसलिए चुनाव की प्रक्रिया पार्टी कार्यालय से अलग जगह आयोजित की गई। अगर पार्टी दफ्तर में बैठक बुलाई जाती तो प्रदेश भर के कार्यकर्ता और नेता इसमें शामिल होने पहुंच जाते। ऐसे में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा तेज हो जाता। इसीलिए बैठक बाहर की गई।
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गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) पर कब्जे की लड़ाई चल रही है। दिवंगत रामविलास पासवान द्वारा बनाई गई पार्टी चाचा पशुपति कुमार पारस और भतीजा चिराग पासवान के बीच बंट गई है। चाचा पशुपति पारस ने पार्टी चिराग पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए पांच सांसदों के साथ मिलकर उन्हें लोकसभा में पार्टी के नेता पद से हटा दिया और अब उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी हटा दिया। वहीं चिराग पासवान चाचा पर विश्वासघात का आरोप लगा रहे हैं। चिराग ने लंबी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।
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