
उत्तराखंड के जसपुर में जाम लगाकर लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले सिविल एसीजेएम की अदालत ने राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय समेत चार विधायकों और 12 अन्य के खिलाफ गैर गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। अक्टूबर 2019 में कोर्ट ने सरकार की ओर से केस वापसी के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था। मामले में सुनवाई की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।
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चलिए बताते हैं कि पूरा मामले है क्या। 12 साल पहले जसपुर में एक युवक दूसरे समुदाय की युवती को लेकर फरार हो गया था। युवती की बरामदगी को लेकर कई संगठनों ने प्रदर्शन किया था। रुद्रपुर विधायक राजकुमार ठुकराल, विधायक अरविंद पांडे (वर्तमान शिक्षा मंत्री), विधायक हरभजन सिंह चीमा, पूर्व सांसद बलराज पासी समेत कई लोगों ने प्रदर्शन कर जसपुर के सुभाष चौक को जाम कर दिया था। इस जाम को हटाने के लिए तत्कालीन एएसपी जगतराम जोशी को लाठीचार्ज करना पड़ा था।
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इस मामले में तत्कालीन कोतवाल जेसी पाठक की तहरीर पर अरविंद पांडेय समेत 15 लोगों को नामजद करते हुए अन्य के खिलाफ सरकारी कामकाज में बाधा डालने और धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में केस दर्ज किया था।
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उत्तराखंड सरकार ने इनके खिलाफ मुकदमे को वापस लेने के आदेश भेज दिए थे। लेकिन निचली कोर्ट ने सरकार का आदेश नहीं माना तो उक्त लोगों ने जिला कोर्ट की शरण ली थी। लेकिन सोमवार को जिला कोर्ट ने इन सब लोगों की रिवीजन को खारिज कर दिया था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद बर्मन की कोर्ट ने 16 लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। कोर्ट ने एएसपी को विशेष टीम गठित कर आरोपियों को 23 अक्टूबर तक न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं।
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