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असम में बाढ़ का कहर जारी, अब तक 97 लोगों की मौत, 15 जिलों में 1.68 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 481 गांव डूबे

असम में बाढ़ से 15 जिले प्रभावित हैं और 1.68 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में हैं। गोलाघाट सबसे ज्यादा प्रभावित है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

फोटोः IANS
फोटोः IANS 

असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और 1.68 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में हैं। सबसे ज्यादा असर गोलाघाट जिले में देखा जा रहा है, जहां धनसिरी (दक्षिण) नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसे देखते हुए असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और हालात सामान्य होने तक नदी से दूर रहने की अपील की है।

15 जिलों के 481 गांव बाढ़ की चपेट में

एएसडीएमए के ताजा बाढ़ बुलेटिन के अनुसार, राज्य के 39 राजस्व सर्किलों के 481 गांवों में कुल 1,68,701 लोग प्रभावित हैं। बाढ़ के पानी में 14,382 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि डूबी हुई है, जिससे खेती-किसानी पर बड़ा असर पड़ा है। गोलाघाट सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां 54,085 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसके बाद शिवसागर में 49,515, जोरहाट में 27,842 और चराइदेव में 21,486 लोग प्रभावित हैं। शिवसागर, जोरहाट, लखीमपुर और चराइदेव से फसलों को भारी नुकसान होने की भी खबर है।

धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर, राहत अभियान जारी

एएसडीएमए के मुताबिक, नुमालीगढ़ में धनसिरी (दक्षिण) नदी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है। हालांकि, फिलहाल राज्य की किसी भी नदी में बाढ़ का उच्चतम स्तर दर्ज नहीं किया गया है। प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद के लिए राज्य सरकार ने 133 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए हैं।

इन शिविरों में 10,111 विस्थापित लोगों ने शरण ली है, जबकि 35,596 अन्य लोगों तक राहत वितरण केंद्रों के जरिए सहायता पहुंचाई जा रही है। प्रभावित परिवारों को चावल, दाल, खाद्य तेल, पशु चारा और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है।

अब तक 97 लोगों की मौत, हजारों पशु और सैकड़ों घर प्रभावित

बाढ़ से अब तक 97 लोगों की मौत हो चुकी है। गोलाघाट और उदलगुरी जिलों में एक-एक व्यक्ति की जान गई है, जबकि फिलहाल किसी के लापता होने की सूचना नहीं है। इस आपदा से 41,475 पशु भी प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा 365 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 40 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए।

राज्य के संवेदनशील इलाकों में राहत, बचाव और पुनर्स्थापन अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों ने नौकाओं और बचाव कर्मियों को तैनात किया है ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

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