केरल विधानसभा चुनावों में सोमवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने अपनी बड़ी बढ़त बना रखी है, जबकि कई सीटों पर मतगणना के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही रुझानों ने संकेत दिया कि विपक्षी गठबंधन 100 सीट के लक्ष्य के करीब पहुंच सकता है। कई दौर के रुझानों के अनुसार, 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ 101 सीट पर आगे चल रहा था, जबकि सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) 40 से कम सीटों पर बढ़त बनाए हुए था।टीवी की खबरों के अनुसार, बीजेपी नीत एनडीए को मात्र दो सीटों पर बढ़त हासिल थी।
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कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, "जनता में सरकार के प्रति एंटी-इनकंबेंसी थी...हमने इस एंटी-इनकंबेंसी का लाभ उठाया। राज्य की जनता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी को बहुत चाहती है...LDF सरकार बहुत भ्रष्ट थी।"
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यदि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा केरल में हारता है, तो यह उसके लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा, क्योंकि फिर देश में कोई भी ऐसा राज्य नहीं बचेगा जहां वह सत्ता में हो। रुझानों के अनुसार, कम से कम एक दर्जन मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में पीछे चल रहे हैं।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन शुरुआत में अपने पारंपरिक गढ़ धर्मदम में पीछे थे, लेकिन बाद के दौर में उन्होंने बढ़त हासिल कर ली और 15 में से 12 दौर की गणना के बाद 8,000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं। कई अन्य मंत्री, वीणा जॉर्ज, एम बी राजेश, ओ आर केलू, आर बिंदु, जे चिंचुरानी, पी राजीव, के बी गणेश कुमार, वी एन वासवन, वी शिवनकुट्टी, वी अब्दुरहिमान, कडन्नापल्ली रामचंद्रन, ए के ससींद्रन और रोशी ऑगस्टीन शुरुआती दौर की मतगणना में पीछे थे।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार को 23,000 से अधिक मतों से हरा दिया, जबकि पद्मजा वेणुगोपाल को त्रिशूर सीट पर लगातार तीसरी बार हार का सामना करना पड़ा। पय्यन्नूर सीट से यूडीएफ समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार वी कुन्हीकृष्णन ने भी जीत दर्ज की। कई पूर्व वाम नेता और बागी उम्मीदवारों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।
यदि ये रुझान परिणामों में बदलते हैं, तो केरल में एक दशक बाद सत्ता परिवर्तन होगा, जहां परंपरागत रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बारी-बारी से सत्ता में आने का चलन रहा है।मतगणना पूरे राज्य के 140 केंद्रों पर जारी है ।
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