
दिवंगत अतीक अहमद के 21 वर्षीय बेटे अबान को शनिवार शाम को भारी पुलस बल की तैनाती के बीच प्रयागराज में कसारी-मसारी के कब्रिस्तान में उसके पिता की कब्र के बगल में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उसके तीनों भाई अली, उमर और अहजम ने उसे कंधा दिया। अबान की मां शाइस्ता परवीन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुईं। वह वर्ष 2023 से फरार हैं। इससे पहले वह अपने पति अतीक अहमद और बेटे असद के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुई थीं।
अबान के जनाजे में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी, जिससे थोड़ी देर के लिए वहां अफरा-तफरी मच गई। अबान के शव को लेकर उसका बड़ा भाई अहजम जब कब्रिस्तान पहुंचा तो उसके पीछे बड़ी संख्या में लोग भी अंदर जाने लगे। पुलिस ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और बैरिकेडिंग टूट गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सख्ती करनी पड़ी। बाद में स्थिति संभलने पर अबान के दफन की रस्म पूरी की गई। पुलिस ने अंतिम संस्कार के दौरान केवल परिवार और चुनिंदा रिश्तेदारों को कब्रिस्तान के भीतर जाने की अनुमति दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से पैरोल मिलने के बाद अली और उमर शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज पहुंचे। अली को झांसी जेल से करीब 400 किलोमीटर की दूरी तय कर लाया गया, जबकि उमर को लखनऊ जेल से प्रयागराज लाया गया। दोनों को अंतिम समय में पुलिस वैन से बाहर निकाला गया। आमना-सामना होते ही अली और उमर एक-दूसरे से गले मिले। इसके बाद दोनों ने मस्जिद में नमाज अदा की और अबान को मिट्टी दी।
परिजन के मुताबिक, अली को सुबह करीब साढ़े नौ बजे झांसी जेल से लगभग 30 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में रवाना किया गया था। यात्रा के दौरान पुलिस वैन पर पर्दे लगाए गए थे, ताकि अली का चेहरा बाहर से दिखाई न दे। उमर को भी इसी तरह सुरक्षा घेरे में लखनऊ से रवाना किया गया। उमर करीब साढ़े चार बजे और अली करीब साढ़े पांच बजे प्रयागराज पहुंचा।
जब अबान के शव को वाहन से उतारा जा रहा था, उस समय अली पुलिस वैन में मौजूद था। उसने वहां मौजूद लोगों को शव उतारने के तरीके को लेकर निर्देश भी दिए। अंतिम संस्कार के बाद अली और उमर को परिवार से मिलने की अनुमति दी गई। हाईकोर्ट ने पैरोल के दौरान दोनों को अपने भाई अहजम और बुआ से मुलाकात की अनुमति दी थी।
पुलिस ने कब्रिस्तान से कुछ दूरी पर स्थित एक मस्जिद के बाहर इसके लिए इंतजाम किया था। मस्जिद के बाहर टेंट लगाया गया था, जहां दोनों ने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद दोनों को वापस जेल ले जाया गया। अली को झांसी और उमर को लखनऊ जेल ले जाने की तैयारी है। दोनों को करीब चार साल बाद पहली बार पैरोल मिली है।
गौरतलब हो कि अबान की गुरुवार सुबह झांसी में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह झांसी जेल में बंद अपने भाई अली से मिलने के लिए प्रयागराज से रवाना हुआ था। क्रेटा कार में उसके साथ चार अन्य लोग भी थे। सुबह करीब 10:30 बजे हाईवे पर एक जानवर को बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। अबान और सोनू के शव शुक्रवार तड़के करीब चार बजे एक ही एंबुलेंस से झांसी से प्रयागराज के हटवा गांव में उसकी बुआ परवीन कुरैशी के घर लाए गए थे।
अबान का शव अतीक अहमद की कब्र के पास ही दफनाया गया है। कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अबान के दादा फिरोज अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्रें भी हैं। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को तीन लोगों ने पुलिस हिरासत में गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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