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बंगालः छिनेगी टीएमसी नेताओं की सुरक्षा, चुनाव आयोग ने भारी पुलिस तैनाती पर उठाया सवाल, समीक्षा का दिया आदेश

चुनाव आयोग ने राज्य की ओर से दी जाने वाली सुरक्षा के लिए नेताओं के चयन में कथित तौर पर पक्षपातपूर्ण रवैये पर भी चिंता जताई है। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, सत्ताधारी दल के नेताओं को अनुपातहीन रूप से ज्यादा सुरक्षा मिली हुई है।

बंगालः छिनेगी टीएमसी नेताओं की सुरक्षा, चुनाव आयोग ने भारी पुलिस तैनाती पर उठाया सवाल, समीक्षा का दिया आदेश
बंगालः छिनेगी टीएमसी नेताओं की सुरक्षा, चुनाव आयोग ने भारी पुलिस तैनाती पर उठाया सवाल, समीक्षा का दिया आदेश फोटोः सोशल मीडिया

पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच टीएमसी नेताओं की सुरक्षा छिन सकती है। दरअसल निर्वाचन आयोग ने राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस द्वारा राज्य में विभिन्न स्तरों पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती का संज्ञान लेते हुए आपत्ति जताई है। आयोग ने डीजीपी को इसकी समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

चुनाव आयोग ने राज्य की ओर से दी जाने वाली सुरक्षा के लिए नेताओं के चयन में कथित तौर पर पक्षपातपूर्ण रवैये पर भी चिंता जताई है। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, सत्ताधारी दल के नेताओं को अनुपातहीन रूप से ज्यादा सुरक्षा मिली हुई है। आयोग ने यह भी पाया कि चुनावों की घोषणा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 832 ऐसे लोगों को सुरक्षा देने के लिए 2,185 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था, जो सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे। इसके साथ ही, 144 अन्य लोगों को भी सुरक्षा दी गई थी, जिनमें सत्ताधारी दल के समर्थक शामिल थे।

सूत्रों ने बताया कि आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को निर्देश दिया है कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से एक सख्त पेशेवर समीक्षा करें। माना जा रहा है कि डीजीपी की रिपोर्ट के बाद आयोग टीएमसी नेताओं की सुरक्षा हटाने का आदेश दे सकता है।

इससे पहले दिन में आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस से एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। यह रिपोर्ट आयोग के उस पिछले आदेश के पालन के संबंध में थी, जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड वाले और दागदार छवि वाले राजनीतिक नेताओं से, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, राज्य द्वारा दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया गया था।

इससे पहले, आयोग ने उन नेताओं को राज्य की ओर से दी गई सुरक्षा हटाने का निर्देश दिया था, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों। इसमें वे नेता भी शामिल थे जो जमानत या पैरोल पर बाहर हैं, जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, या जिनका आपराधिक इतिहास रहा है। इस तरह की सुरक्षा हटाने की समय सीमा गुरुवार आधी रात तक थी।

आयोग ने उन नेताओं की सुरक्षा भी हटाने का निर्देश दिया, जो प्रोटोकॉल के अनुसार हकदार न होते हुए भी, राज्य की ओर से दी गई अनधिकृत सुरक्षा का लाभ उठा रहे थे। आयोग ने ऐसे दागी राजनीतिक नेताओं के संबंध में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए, जिनके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट अभी तक तामील नहीं किए गए हैं। ऐसे मामलों में आयोग ने निर्देश दिया कि वारंटों को उचित समय सीमा के भीतर तामील किया जाए।

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