
उत्तर प्रदेश के गोंडा में हुए ट्रेन हादसे की जांच रिपोर्ट में अहम खुलासा हुआ है। जांच में यह बात सामने आई है कि इंजीनियरिंग सेक्शन की लापरवाही की वजह से चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के डिब्बे पटरी से उतर गए और 3 लोगों की मौत हो गई और 18 लोग घायल हो गए। हादसा 18 जुलाई को हुआ था।
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हादसे की जांच कर रहे वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों की 5 सदस्य टीम ने दुर्घटना के पीछे की वजह बताया है। जांच टीम ने रेलवे ट्रैक की मरम्मत में लापरवाही और पटरी का ठीक से कसे न होने को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया।
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जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि सेक्शन पर ट्रेन को 30 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाना था, लेकिन सूचना देर से दी गई। ऐसे में लोको पायलट को सतर्क होने का समय नहीं मिला। हादसे के समय 3 मीटर पटरी फैल गई जिससे पावर जनरेटर कार का पहिया उतर गया। लोको पायलट ने झटका लगने पर इमरजेंसी ब्रेक लगाया लेकिन, उस समय ट्रेन की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटे होने की बजाय करीब 86 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैन दौड़ रही थी। ऐसे में 19 बोगियां पटरी से उतर गईं।
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