
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि बजट 2026 पेश करते हुए खेती और किसानों को मजबूत बनाने की बात तो दोहराई, लेकिन किसानों की आमदनी दोगुनी करने के पुराने वादे पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। बजट भाषण में खेती से जुड़े नए क्षेत्रों, विविधता और मूल्यवर्धन पर जोर दिखा, पर यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सरकार उस बड़े वादे के लक्ष्य से कितनी दूर या कितनी करीब पहुंची है।
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किसानों की आय बढ़ाने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। इस बार भी वित्त मंत्री ने खेती को फायदे का सौदा बनाने की बात कही, लेकिन किसानों की आमदनी दोगुनी करने के वादे का न तो जिक्र हुआ और न ही कोई समयसीमा बताई गई। यही वजह है कि बजट के बाद यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ कि आखिर उस वादे का क्या हुआ, जिसे सरकार ने बार-बार दोहराया था।
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ग्रामीण रोजगार के लिए मनरेगा की जगह लाई गई वीबी ग्राम जी योजना को लेकर भी बजट में तस्वीर साफ नहीं हुई। योजना का नाम जरूर लिया गया, लेकिन इस पर कितना खर्च होगा, इसके लिए कितना बजट तय किया गया है और इसका दायरा क्या होगा—इन सवालों के जवाब बजट भाषण में नहीं मिले। इससे ग्रामीण रोजगार और किसानों की अतिरिक्त आय को लेकर असमंजस बना हुआ है।
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वित्त मंत्री ने यह जरूर साफ किया कि सरकार का लक्ष्य केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि खेती से जुड़े अन्य क्षेत्रों को मजबूत करके किसानों को ज्यादा कमाई के मौके दिए जाएंगे। इसमें डेयरी, मुर्गी पालन, बागवानी और खास फसलों को प्रमुखता दी गई है। सरकार का मानना है कि खेती में विविधता बढ़ाने से किसानों की आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
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बजट भाषण में डेयरी और मुर्गी पालन को खास जगह मिली। वित्त मंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों से लाखों किसान और छोटे परिवार जुड़े हैं। सरकार चाहती है कि दूध, अंडे और उनसे जुड़े उत्पादों के जरिए किसानों को स्थायी आमदनी मिले। इसके लिए बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच बढ़ाने की बात कही गई है, ताकि किसान अपनी उपज का सही दाम पा सकें।
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वित्त मंत्री ने बताया कि नारियल उत्पादन में भारत दुनिया में अग्रणी है और करीब तीन करोड़ लोग सीधे या परोक्ष रूप से इस क्षेत्र से जुड़े हैं। इसे देखते हुए सरकार ने प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में नई सुविधाएं स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का दावा है कि इससे नारियल किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य मिलेगा और नारियल से बनने वाले तेल, रेशा और अन्य उत्पादों का मूल्यवर्धन बढ़ेगा।
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कृषि बजट 2026 में काजू और कोको को भी अहम स्थान दिया गया है। सरकार इन फसलों के उत्पादन के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान बनाने के लिए किसानों और उद्यमियों को सहायता देने की बात कही गई है। इसके अलावा चंदन की खेती को फिर से बढ़ावा देने का भी ऐलान किया गया है।
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बजट में पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि इस क्षेत्र में बादाम और मूंगफली जैसी फसलों को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय किसानों को नई फसलें अपनाने और बेहतर आमदनी के अवसर मिलेंगे।
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