
कांग्रेस ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया। कांग्रेस ने इसमें राज्य के आर्थिक विकास को तरजीह देते हुए महिलाओं के लिए स्नातकोत्तर तक मुफ्त शिक्षा और एक वर्ष के भीतर सभी रिक्त सरकारी पदों पर युवाओं की भर्ती करने समेत कई वादे किये हैं। इसमें सरकारी सहायता वितरण के बजाय राजकोषीय स्थिति में सुधार, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लिए एक वैकल्पिक आर्थिक मॉडल को प्राथमिकता दी गई है।
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काग्रेस ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं के लिए प्रति माह 2000 रुपये की सहायता, स्नातकोत्तर तक मुफ्त शिक्षा और मुफ्त परिवहन सेवा का वादा किया है। पार्टी ने पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में एआई एवं कौशल विकास केंद्र खोलने के साथ ही हर परिवार के लिए 10 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा का भी वादा किया है। कांग्रेस के घोषणापत्र में सीमांत, भूमिहीन किसानों के लिए 15000 रुपये प्रति वर्ष एवं 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली का वादा किया गया है।
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कोलकाता में घोषणापत्र जारी करने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि पार्टी सरकारी सहायता वितरण के वादों के बजाय आर्थिक विकास को प्राथमिकता क्यों दे रही है। खड़गे ने कहा कि हम पश्चिम बंगाल के लोगों को नए विकल्प देना चाहते हैं। इसलिए हमारे घोषणापत्र में सरकारी सहायता वितरण की बात नहीं है। इसमें राज्य की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण और सुधार की बात है। उन्होंने बीजेपी और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस दोनों पर तीखे हमले किए और दोनों को एक ही श्रेणी में रखा।
उन्होंने कहा कि पहले, अगर कोई उद्योग की बात करता था, तो वह कोलकाता की बात करता था। अब पश्चिम बंगाल के युवा महाराष्ट्र, चेन्नई और हैदराबाद की ओर पलायन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की स्थिति बहुत खराब है। युवा लड़के-लड़कियां डिग्री लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं। यहां की सरकार के पास कोई योजना नहीं है। बीजेपी इन बातों पर ध्यान नहीं देती। वे सिर्फ हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे भड़काते हैं। इसलिए हमने पश्चिम बंगाल में एक तीसरा विकल्प पेश किया है। खड़गे ने कहा कि राज्य प्रशासन में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। एक राज्य मंत्री के घर से लगभग 50 करोड़ रुपए बरामद हुए हैं। अब पश्चिम बंगाल को कानून के शासन की ओर ले जाने की जरूरत है।
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खड़गे की बात को दोहराते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के मीडिया प्रकोष्ठ के प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग तृणमूल कांग्रेस के भ्रष्टाचार और भारतीय जनता पार्टी की सांप्रदायिक विभाजनकारी राजनीति के बीच फंसे हुए हैं, इसलिए उन्हें एक विकल्प की आवश्यकता है। जयराम रमेश ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और पश्चिम बंगाल को एक नए सिक्के की जरूरत है। उन्होंने 20 साल बाद राज्य में कांग्रेस द्वारा अकेले चुनाव लड़ने के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे राज्य को एक ‘‘तीसरा रास्ता’’ दिखाई देगा।
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जयराम रमेश ने बीजेपी पर रवींद्रनाथ टैगोर को ‘बदनाम’ करने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को मिटाना चाहती है। रमेश ने याद दिलाया कि तीन महीने पहले लोकसभा और राज्यसभा में वंदे मातरम् पर एक विशेष बहस हुई थी, जिसके पीछे बीजेपी का उद्देश्य बंकिम चंद्र चटर्जी के कंधे पर बंदूक रखकर रवींद्रनाथ टैगोर को निशाना बनाना था। उन्होंने कहा कि आपको वंदे मातरम राष्ट्रगान याद होगा। 1937 में, कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में...टैगोर की सलाह पर यह तय किया गया था कि इस गीत को कैसे अपनाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी टैगोर को ‘बदनाम’ कर रही है और वे जन गण मन को खत्म करना चाहते हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यह उनका ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ है।
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पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होंगे। मतों की गिनती चार मई को होगी। इस बार राज्य में बहुकोणीय मुकाबला दिखाई दे रहा है। राज्य में 15 साल से सत्तारूढ़ टीएमसी को बीजेपी, कांग्रेस, वाम गठबंधन के साथ ही एआईएमआईएम के गठबंधन की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।
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