
कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताओं और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद को लेकर सोमवार को देश के कई राज्यों में जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान कई शहरों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ झड़प भी हुई और उन पर पानी की बौछार के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस ने इसी विषय पर मंगलवार को अपनी शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक भी बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
राजधानी दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय से निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान विशेष रूप से झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को निर्धारित समयसीमा के भीतर मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
भारतीय युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने भी दिल्ली में इस विषय को लेकर प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे मांग की। उत्तर प्रदेश के आगरा में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के विजय नगर स्थित पुश्तैनी आवास आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके आवास के बाहर पेंट से ‘ज्ञानेश गद्दार, वोट चोर’ लिख दिया।
राजस्थान में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों तथा ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन और मार्च किया। जयपुर में पार्टी नेता शहीद स्मारक पर एकत्र हुए। इनमें राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली शामिल थे। नेताओं के संबोधन के बाद कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस ने पानी की बौछार का भी इस्तेमाल किया। इसके बाद पुलिस कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को वाहनों में बैठाकर थाने ले गई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने थाने में भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ नारेबाजी की।
इससे पहले प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि देश में ‘‘खतरनाक खेल’’ खेला जा रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। गहलोत ने कहा, ‘‘कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सतर्क रहना होगा। यह करो या मरो की लड़ाई है। कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जाना चाहिए, देश के हालात को समझना चाहिए और देखना चाहिए कि वे लोकतंत्र को बचाने में कैसे योगदान दे सकते हैं।’’
झारखंड के रांची में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय का घेराव किया और झारखंड के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुराने विधानसभा परिसर के पास से विरोध मार्च निकाला, जो धुर्वा स्थित सीईओ कार्यालय पहुंचकर समाप्त हुआ।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने आरोप लगाया, “ज्ञानेश कुमार भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं और लोकतंत्र की मर्यादा को भंग कर रहे हैं। वह वोट चोरी में लगे हुए हैं।” कमलेश ने कहा, “हमारे नेता राहुल गांधी ने पूरे देश के सामने हरियाणा और महाराष्ट्र में वोट चोरी के संबंध में सबूत और तथ्य रखे हैं।”
केरलम में भी कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने सोमवार को कहा कि देश के लोगों का निर्वाचन आयोग पर भरोसा नहीं रह गया है। चेन्निथला ने निर्वाचन आयोग पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा निर्वाचन आयोग के तहत एक और चुनाव कराना ‘‘धोखा’’ होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, अगर भारत में संसदीय लोकतंत्र को कायम रखना है तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और निर्वाचन आयुक्तों के चयन के लिए बनी समिति का पुनर्गठन कर उसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश को शामिल किया जाना चाहिए।’
छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सोमवार को राजधानी रायपुर समेत राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया और एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाया। रायपुर में प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य प्रभारी सुखदेव भगत और प्रदेश इकाई के अध्यक्ष दीपक बैज ने किया। प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए।
कांग्रेस कार्यकर्ता राजीव गांधी चौक पर एकत्र हुए और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, शाह और कुमार के पुतले भी जलाए। भगत ने सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है और निर्वाचन आयोग बीजेपी के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया तथा केरल के एक पूर्व मुख्य सचिव द्वारा कुमार पर लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की।
राज्य के अन्य जिलों में भी प्रदर्शन किए गए। दुर्ग में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदर्शन में शामिल हुए। कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ते समय प्रदर्शनकारियों ने दो अवरोधक पार किए, जिसके बाद पुलिसकर्मियों और कुछ प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। बाद में कांग्रेस नेताओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने मतदाता सूची के एसआईआर में अनियमितताओं और निर्वाचन आयोग के पक्षपातपूर्ण तरीके से कामकाज का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को राज्यभर में प्रदर्शन किए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कर्नाटक के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इन्हीं मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मेंगलुरु में दक्षिण कन्नड़ जिला कांग्रेस कमेटी ने पंपवेल के महावीर सर्किल से पडिल स्थित उपायुक्त कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला और इसके बाद प्रदर्शन सभा की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारे लगाए तथा कुमार के तत्काल इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद्मराज आर. पुजारी, विधान परिषद सदस्य इवान डिसूजा और पी. वी. मोहन तथा पूर्व विधायक जे. आर. लोबो शामिल हुए।
इसके आलावा, कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई ने कथित ‘‘वोट चोरी’’ को लेकर सोमवार को जम्मू क्षेत्र में प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा गिरफ्तारी की मांग की। जम्मू में जिला कांग्रेस कमेटी जम्मू शहरी और ग्रामीण ने शहीदी चौक पर प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने तख्तियां लेकर नारेबाजी की और फिर उपायुक्त कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने उनके बीच मार्च को रोक दिया।
प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले पूर्व मंत्री और डीसीसी जम्मू शहरी के अध्यक्ष योगेश साहनी ने कहा, ‘‘आज हमारी चार मांगें हैं। पहली, हम कुमार का इस्तीफा चाहते हैं। दूसरी, उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। तीसरी, उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए सभी फैसले वापस लिए जाने चाहिए। चौथी, इन कदमों के पीछे जो लोग हैं, उन्हें भी इस्तीफा देना चाहिए।’’ पुंछ, उधमपुर, कठुआ, सांबा, रामबन, राजौरी और डोडा जिलों में भी प्रदर्शन किए गए।
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने दावा किया कि मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस की चिंताओं की पुष्टि हो गई है, क्योंकि दो चुनाव आयुक्तों ने इस मुद्दे को स्वीकार किया है। विक्रमार्क ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय पर सत्तारूढ़ कांग्रेस की ओर से आयोजित धरने में हिस्सा लिया। प्रदर्शन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई।
मणिपुर में भी कांग्रेस के सदस्यों और समर्थकों ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और एसआईआर को लेकर पार्टी के आरोपों के बीच ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए कई जिलों में प्रदर्शन किया। इंफाल पूर्वी जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पोरोमपत स्थित उपायुक्त कार्यालय के पास प्रदर्शन किया और कुमार के खिलाफ नारे लगाए। कांग्रेस के उपाध्यक्ष अमीन शाह ने कहा, ‘‘कुमार के खिलाफ हमारा प्रदर्शन देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा है। हमारा उद्देश्य उन्हें गिरफ्तार करवाना, न्याय सुनिश्चित करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करना है।’’
निर्वाचन आयोग के भीतर मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर मतभेद सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर में दावा किया गया है कि पिछले 10 महीने में दो निर्वाचन आयुक्तों ने ऐसे मामलों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों में एसआईआर से जुड़ी आपत्तियां भी शामिल हैं।