देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं होने का दावा करने के लिए सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने सोमवार को राज्यसभा में प्रश्न किया कि देश भर में एलपीजी सिलेंडर के लिए लोगों की लाइनें विपक्ष के कहने पर लगी हैं?
उच्च सदन में अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा शुरू करते हुए गोहिल ने सरकार से यह प्रश्न किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कभी यह क्यों नहीं सोचा कि भविष्य में देश की तेल एवं गैस की आपूर्ति लाइन बाधित हो सकती है या रुक जाती है तो उस स्थिति के लिए क्या तैयारी है?
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उन्होंने कहा कि ईरान के साथ भारत के बहुत अच्छे संबंध थे। उन्होंने अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध से कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजराइल यात्रा का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हमें कोई जरूरत नहीं थी इजराइल जाने की? ‘यह मां की भूमि, यह बाप की भूमि’ कहने की कोई जरूरत नहीं थी।’’
शक्तिसिंह गोहिल ने सरकार को आगाह किया कि भारत की विदेश नीति किसी राजनीतिक दल की नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक पार्टी (सत्ता में) आती है, जाती है। विदेश नीति देश के लिए होती है। यह देश के हित में होती है, इसमें बिना सोचे-समझे काम नहीं किया जाता।’’
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उन्होंने कहा कि सरकार कह रही है कि देश में गैस की कहीं भी कमी नहीं है किंतु अहमदाबाद से लेकर हर जगह गैस सिलेंडर के लिए जो लाइनें लगी हैं, क्या वह विपक्ष ने लगवायी हैं? उन्होंने कहा कि जब तक जनता की समस्या को स्वीकार नहीं किया जाएगा तब तक उसका हल नहीं निकाला जा सकता।
गोहिल ने कहा कि सरकार किसानों को नैनो यूरिया लेने के लिए विवश कर रही है किंतु यह पूछा जाना चाहिए कि इससे कितने किसान खुश हैं?
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उन्होंने कहा कि आज सरकार की सबसे ज्यादा चिंता गैस आपूर्ति की है तथा इसके लिए 58 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें आप एक प्रावधान यह भी करिए क्योंकि एक गैर-जैविक वैज्ञानिक ने कहा है कि नाली में बरतन उल्टा करो और उसमें छेद करो तो उसमें से गैस निकल सकती है और चाय का ठेला लग सकता है।’’
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि यदि ऐसी ही बात है तो अनुदान की अनुपूरक मांग में आवंटित 58 हजार करोड़ रूपये में से कुछ प्रावधान इसके लिए भी किया जाना चाहिए क्योंकि नाली तो हर जगह है।
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