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पंचायत चुनाव के बाद से पश्चिमी यूपी में टूटा कोरोना का कहर, गांवों तक पहुंचा संक्रमण, हालत हुए गंभीर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई इलाकों के अलावा मुजफ्फरनगर के हालात कुछ ज्यादा ही खराब नजर आ रहे है। पिछली लहर में जहां केसों की संख्या सीमित थी। वहीं इस बार संक्रमण का फैलाव तहसीलों और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से हुआ है।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण शहर के अलावा इलाके के गांवों में भी पहुंच चुका है। इनमें मुजफ्फरनगर के गांव कुछ ज्यादा प्रभावित दिख रहे हैं। हालांकि अभी तक सरकारी आंकड़ों में इनकी संख्या सामने नहीं आ पा रही है। लेकिन ग्रामीण इलाकों से आ रही रिपोर्ट में हालत काफी खराब बताई जा रही है।

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माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव के बाद संक्रमण का असर गांवों तक पहुंच गया है और महामारी से मौतें भी हो रही है। यहां पर ज्यादातर मामले तेज बुखार के सामने आ रहे हैं। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में सांस लेने में भी लोगों को परेशानियां हो रही हैं। ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में मरीजों का अभी तक टेस्ट नहीं हो पाया है। टेस्ट के बाद सही हालत का पता चल सकेगा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में पिछले दो-तीन दिनों में नए संक्रमित रोगी अधिक मिल रहे हैं। इनकी तुलना में अस्पतालों से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या कम है। मेरठ में गुरुवार को 1167 रोगी मिले जबकि 750 ही डिस्चार्ज हुए। गौतमबुद्ध नगर में 1227 नए रोगी मिले जबकि 1027 डिस्चार्ज हुए। गाजियाबाद में 953 नए मरीजों की तुलना में 715 ही डिस्चार्ज हुए। मुरादाबाद में 1303 नए रोगी मिले जबकि 907 ही डिस्चार्ज हुए। मुजफ्फरनगर में 704 नए मरीज मिले और 356 ही डिस्चार्ज हुए। इसी प्रकार सहारनपुर में 687 की तुलना में 611 रोगियों को अस्पताल से छुट्टी मिली। इस कारण इन जिलों में कुल संक्रमित रोगियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। गुरुवार को मुजफ्फरनगर में 21, गाजियाबाद में 15, मेरठ में 12, व गौतमबुद्धनगर में 13 मरीजों की मौत हो गई।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन इलाकों के अलावा मुजफ्फरनगर के हालात कुछ ज्यादा ही खराब नजर आ रहे है। पिछली लहर में जहां केसों की संख्या सीमित थी। वहीं इस बार संक्रमण का फैलाव तहसीलों और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से हुआ है। स्वाथ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 6 मई को तहसील बुढ़ाना में 63, मोराना, 94, मुजफ्फरनगर ग्रामीण में 175, अर्बन में 264, खतौली में 59, जानसठ 57 मामले आए। जिसमें 21 मौते हुई है। सरकार की ओर हर गांवों को एंटीजन के माध्यम से टेस्ट कराने की बात कही गयी है। शायद उसी में कुछ मरीजों की संख्या के आंकड़े सामने आ सके।

एक समाजिक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया '' पंचायत चुनाव के बाद से कोरोना का कहर मुजफ्फरनगर जिले में टूट पड़ा। इसमें खासतौर ग्रामीण इलाके ज्यादा प्रभावित है। इलाके में लोगो को बुखार आ रहा है। बुढ़ाना तहसील और खतौली इलाके में संक्रमित बहुत ज्यादा मिले हैं। यहां पर मौतें भी हो रही है। हमारे यहां कई श्क्षिक और अन्य कर्मचारी इस संक्रमण से मर चुके है। कई गंभीर रूप से भर्ती है। यहां पर 350 के आस-पास श्क्षिक इस संक्रमण की चपेट में है। करीब 20 शिक्षक प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल के काल गाल में समाहित हो गये हैं।''

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मुजफ्फरनगर के एसीएमओ वीके सिंह ने बताया '' खतौली, जानसठ, शहरी मुजफ्फरनगर और अर्बन इलाकों में संक्रमण ज्यादा है। इन इलाकों में सर्वे टीम लगायी गयी है। 50 टीमें अर्बन क्षेत्रों घर-घर जा कर जांच कर रही है। हर पांच टीमों पर एक-एक आरआरटी टीम काम कर रही है। जिसमें डाक्टर शामिल है। दो न्याय पंचायतों में पांच-पांच की टीम गठित है। घर में जाकर मरीज को देखती है। अगर सामान्य है तो उन्हें घर में रखने की सलाह देती है। अगर हलात गंभीर है तो उन्हें आरआरटी टीम के डाक्टर उन्हें देखते है। ग्रामीण इलाकों में काफी मुस्तैदी है। ग्रामीण इलाकों में जहां हालत खराब की सूचना मिलती है वहां टीम पहुंचकर उन्हें इलाज मुहैया करा रही है। अभी तक ग्रामीण इलाके में एंटीजन 890 सैंपल मिले थे। जिसमें 27 पॉजटिव मिले थे। पॉजटिव को होमआइसोलेट किया गया है। उन्होंने बताया कि स्टाफ की बहुत ज्यादा कमी होती है। एक तिहाई पॉजटिव है, इस कारण काम धीमा दिख रहा है। अभी गंभीर हालत से निपटने के लिए सीएचसी में बेडों का इंतजाम किया गया है।''

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