
एक तरफ जहां जीसीसी (गल्फ कोआपरेशन काउंसिल) के सदस्य देशों ने कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत में तेल-गैस ठिकानों पर ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के पार्स गैस क्षेत्र पर इजरायली हमला अमेरिका की जानकारी या सहमति के बिना किया गया। लेकिन सबसे चौंकाने वाला बयान अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का था, जिन्होंने कहा कि अमेरिका ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है, जो दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट की एक स्वीकारोक्ति है।
ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़रायल के एकतरफा युद्ध के 20वें दिन 19 मार्च 2026 को सामने आया संदेश एकदम साफ और चुनौतीपूर्ण था। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची के एक बयान में कहा गया, “हमारे बुनियादी ढांचे पर इज़राइल के हमले के जवाब में (गल्फ कोआपरेशन काउंसिल के सदस्य देशों के तेल क्षेत्रों पर जवाबी हमले) हमने अपनी ताकत का सिर्फ एक ‘छोटा सा हिस्सा’ ही इस्तेमाल किया है। एहतियात बरतने की वजह उस अनुरोध का सम्मान करना था जिसमें तनाव कम करने का आग्रह किया गया है। अगर हमारे बुनियादी ढांचे पर फिर से हमला हुआ, तो हम बिल्कुल भी संयम नहीं बरतेंगे। इस युद्ध को समाप्त करने के लिए कोई भी पहल हमारे नागरिक स्थलों को हुए नुकसान की भरपाई के साथ ही सार्थक हो सकती है।”
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भले ही राष्ट्रपति ट्रम्प और अमेरिकी रक्षा सचिव (जिन्हें अब युद्ध मंत्री कहा जाता है) पीट हेगसेथ ईरान को पहले से भी ज़्यादा ज़बरदस्त 'कार्पेट बॉम्बिंग' की धमकियां देते रहे हैं, लेकिन ईरानी नेताओं ने हर बार उनका मज़ाक उड़ाते हुए जवाब दिया है। हेगसेथ के इस बयान का ज़िक्र करते हुए कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए पेंटागन को 200 अरब डॉलर और चाहिए होंगे, अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में पलटवार किया। उन्होंने कहा, "यह तो हमारी अपनी मर्ज़ी का युद्ध है, जो ईरानियों और अमेरिकियों, दोनों पर थोपा गया है; इसे शुरू हुए अभी सिर्फ़ तीन हफ़्ते ही हुए हैं। ये 200 अरब डॉलर तो अभी बस शुरुआत भर हैं। आम अमेरिकी नागरिक इस 'ट्रिलियन-डॉलर वाले इज़रायल फर्स्ट टैक्स के लिए बेंन्यामिन नेतन्याहू और अमेरिकी कांग्रेस में बैठे उनके चमचों का शुक्रिया अदा कर सकते हैं, जिसकी मार अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाली है।"
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इससे भी ज़्यादा व्यंग्यात्मक वह ट्वीट था, जिसमें ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ ने कहा, "इजरायली और अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के बयानों के अनुसार, अब तक ईरान के 320 प्रतिशत मिसाइल लॉन्चर नष्ट हो चुके हैं। इसके बावजूद, ईरान लगातार तेज़ी से मिसाइलें दाग़ रहा है। अब, दुश्मन का लक्ष्य इनमें से 500 प्रतिशत तक को नष्ट करना है! अमेरिकी सेना के लिए यह एक अनोखी उपलब्धि है!"
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वैसे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन की प्रतिक्रिया थोड़ी संयमित थी। उन्होंने एक बयान में कहा, “इज़राइल अपने आतंक के घिनौने तरीकों को सामान्य बनाने के नतीजों की कोई परवाह नहीं करता। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस लापरवाही को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए; क्योंकि हर क्रिया की अनिवार्य रूप से और हमेशा एक प्रतिक्रिया होती है।”
इस बीच पहली बार इज़राइल के भीतर से यह स्वीकार किया गया कि उसे ईरानी मिसाइलों से ज़बरदस्त मार पड़ी रही है। फ़ॉक्स न्यूज़ पर एक सैन्य प्रवक्ता को दिखाया गया, जिसने ईरान पर क्लस्टर मिसाइलों से नागरिक इलाक़ों को निशाना बनाकर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया। इसी शो में प्रवक्ता ने यह भी माना कि इज़राइल के कई हिस्सों में हवाई रक्षा प्रणालियों को काफ़ी 'नुक़सान' पहुँचा है।
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जैसे-जैसे शब्दों की जंग इस बेमतलब 'चुनावी जंग' की पहचान बनती जा रही है, राष्ट्रपति ट्रम्प की 'ट्रुथ सोशल' पर की गई पोस्ट ने हलचल मचा दी है। "मध्य-पूर्व में जो कुछ हुआ है, उससे गुस्सा होकर इज़रायल ने ईरान में 'साउथ पार्स गैस फील्ड' नाम की एक बड़ी जगह पर ज़ोरदार हमला किया है। वैसे इस पूरी जगह का एक छोटा सा हिस्सा ही निशाने पर आया है।" उन्होंने आगे कहा कि, "अमेरिका को इस खास हमले के बारे में कुछ भी पता नहीं था, और कतर देश किसी भी तरह से इसमें शामिल नहीं था, न ही उसे कोई अंदाज़ा था कि ऐसा होने वाला है। बदकिस्मती से, ईरान को यह बात पता नहीं थी, या साउथ पार्स हमले से जुड़े किसी भी ज़रूरी तथ्य के बारे में जानकारी नहीं थी...।" इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने फिर से कतर के गैस फील्ड पर हमला करने की हिम्मत की, तो अमेरिका पूरे साउथ पार्स गैस फील्ड को तबाह कर देगा।
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मिली-जुली ख़बरों से भरा यह दिन जब खत्म हो रहा है तो इस बीच अमेरिकी वित्त मंत्री (ट्रेजरी सेक्रेटरी) स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की कि जिस तरह रूसी तेल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी गई थी, उसी तरह अमेरिका ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को भी हटा सकता है, विशेष रूप से उन कंटेनरों के मामले में जो पहले से ही गहरे समुद्र में हैं।
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