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दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई विवादित चैनल के 'नौकरशाही घोटाले' कार्यक्रम पर रोक, जामिया छात्रों को जिहादी कहा था

सुदर्शन टीवी के विवादित कार्यक्रम पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। साथ ही चैनल के संपादक सुरेश चव्हाणके को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी। कोर्ट ने यह रोक जामिया के मौजूदा और पूर्व छात्रों की याचिका पर लगाई।

फोटो सुरेश चव्हाणके के फेसुबक पेज से ली गई है
फोटो सुरेश चव्हाणके के फेसुबक पेज से ली गई है 

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुदर्शन टीवी पर प्रस्तावित विवादित कार्यक्रम पर रोक लगा दी है, साथ ही इस कार्यक्रम को अगले 8 दिन तक प्रसारित न करने का आदेश देते हुए चैनल के एडिटर से जवाब तलब किय है। यह कार्यक्रम आज यानी शुक्रवार को रात 8 बजे प्रसारित होना था। कार्यक्रम के प्रोमो में यूपीएससी परीक्षाओं पर सवाल उठाते हुए जामिया के जिहादी नाम दिया गया था।

हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व और मौजूदा छात्रों की ओर से दायर याचिका पर केन्द्र सरकार, संघ लोक सेवा आयोग, सुदर्शन टीवी और उसके प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है

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इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई सितंबर में करने का आदेश दिया है। याचिका में कहा गया था कि प्रस्तावित कार्यक्रम का मकसद जामिया मिल्लिया इस्लामिया और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करना और उनके खिलाफ नफरत फैलाना है।

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दरअसल, सिविल सेवाओं में बड़ी संख्या में मुस्लिमों के आने संबंधी एक टीवी चैनल के कार्यक्रम की प्रचार क्लिप पर बृहस्पतिवार को विवाद खड़ा हो गया था। जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) और सेवारत तथा सेवानिवृत्त नौकरशाहों समेत अनेक लोगों ने अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर इस तरह की रिपोर्ट की निंदा की। आईपीएस एसोसिएशन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘सुदर्शन टीवी धर्म के आधार पर सिविल सेवाओं में चयनित अभ्यर्थियों को निशाना बनाते हुए खबर चला रहा है। हम सांप्रदायिक और गैरजिम्मेदाराना पत्रकारिता की निंदा करते हैं।’ वहीं भारतीय पुलिस फाउंडेशन ने इसे ‘जहर’ की संज्ञा दी थी। साथ ही बीएसपी सांसद कुंवर दानिश अली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा ट्विटर इंडिया से चव्हाणके के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया।

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जामिया मिलिया इस्लामिया के जनसंपर्क अधिकारी अहमद अजीम ने कहा, ‘‘हमने शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है और उनसे उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने उन्हें बताया है कि सुदर्शन चैनल ने न केवल जेएमआई और एक समुदाय विशेष की छवि खराब करने की कोशिश की, बल्कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की छवि को भी खराब करने का प्रयास किया है।’’

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