हालात

दिल्ली: वायु प्रदूषण को लेकर सरकार पर भड़के संदीप दीक्षित, कहा- अभी जो गंभीर हालात हैं, वो स्लो-पॉईजन जैसा है

संदीप दीक्षित ने कहा कि वायु प्रदूषण में बहुत थोड़ा हिस्सा ही पराली और दीवाली के समय पटाखों का जलने से आता है। सर्दियों के समय थोड़ा सा प्रदूषण महसूस होता है। मगर ये बड़े कारण नहीं है।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने वायु प्रदूषण को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की प्रदूषित हवा हर सीमा पार कर चुकी है। दिल्ली में अभी जो गंभीर हालात हैं, वो स्लो-पॉईजन जैसा है। डॉक्टरों का भी कहना है कि दिल्ली की प्रदूषित हवा एक सामान्य व्यक्ति का जीवन 6 से 7 साल तक कम कर रही है और बीमार व्यक्ति को खतरा ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि  वायु प्रदूषण के कई कारण हैं, लेकिन नागरिक के तौर पर हमें सरकारों से सवाल पूछने होंगे और उन्हें अपने काम के प्रति जवाबदेह बनाना होगा।

Published: undefined

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण में बहुत थोड़ा हिस्सा ही पराली और दीवाली के समय पटाखों का जलने से आता है। सर्दियों के समय थोड़ा सा प्रदूषण महसूस होता है। मगर ये बड़े कारण नहीं है।

उन्होंने कहा कि

• एयर पॉल्यूशन की बड़ी वजह वाहनों से होने वाला प्रदूषण है, जो पूरे साल जारी रहता है। ये हिस्सा 35% के करीब का है

• BJP-AAP सरकार के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सामान्य व्यक्ति पिस रहा है। सरकारों के छलावे में दिल्ली के लोग त्रस्त हैं

• सरकार प्रदूषण को कंट्रोल करे और अगर वे यह काम नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें सरकार कहलाने का हक नहीं है मेरा यही कहना है- जनता को गुमराह करना बंद करिए, क्योंकि एयर पॉल्यूशन के चलते यह शहर अब रहने लायक नहीं बचा है।

Published: undefined

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में जब विकास हो रहा था, तब ट्रैफिक की औसतन रफ़्तार 35 से 40 किलोमीटर हुआ करती थी। आज सरकार की नाकामी के कारण ट्रैफिक की रफ़्तार कम हो गई है। रोड-इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है और इस कारण वाहनों से प्रदूषण का स्तर ढाई गुना तक बढ़ गया है। दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट ध्वस्त हो चुका है। आज बसों से यात्रा करने वालों की संख्या कम हो गई है और वाहनों की संख्या बढ़ गई है। सवाल ये भी है कि दिल्ली में मेट्रो के नए रूट क्यों नहीं बन रहे हैं?

Published: undefined

उन्होंने कहा कि प्रदूषण का एक और सबसे बड़ा कारण इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन भी है, जो गंदा फ्यूल इस्तेमाल कर रही हैं। दिल्ली में MCD, पुलिस और राजनेताओं की मिलीभगत के बिना अवैध फैक्ट्रियां नहीं चल सकती हैं। साल 2004-2005 में जब तत्कालीन सरकार ने कई सारी पॉल्यूटेड इंडस्ट्री हटाई थीं, तो अबकी सरकार ऐसा कदम क्यों नहीं उठा रही है?

Published: undefined

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia

Published: undefined