
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में रिवार दोपहर को पांच मंजिला इमारत ढहने के बाद अभी भी मलबे में जिंदगी की तलाश जारी है। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि रेस्क्यू टीमों ने 11 लोगों को मलबे से बाहर निकाला है। रातभर चले बचाव अभियान के बाद अब हादसे वाली इमारत के साथ-साथ आसपास की दूसरी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी बीच MCD ने हादसे से सटी भवन संख्या 13 को जर्जर और खतरनाक बताते हुए खाली करने का नोटिस जारी किया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से निकाले गए लोगों में से 5 को अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं एक घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में अब तक कुल 6 मौतों की पुष्टि हुई है। रात में एक और व्यक्ति को मलबे से बाहर निकाला गया था, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बावजूद राहत और बचाव टीमों ने तलाश बंद नहीं की है। टीमें मलबे के एक-एक हिस्से को बेहद सावधानी से हटा रही हैं, क्योंकि अभी भी किसी और व्यक्ति के अंदर फंसे होने की आशंका है।
पुलिस के मुताबिक, जिस इमारत में हादसा हुआ, उसका इस्तेमाल PG के तौर पर किया जा रहा था। आरोप है कि ग्राउंड फ्लोर पर रेनोवेशन या निर्माण का काम चल रहा था। इसी दौरान ढांचा कमजोर होने की वजह से इमारत गिरने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस और राहत-बचाव एजेंसियों का मुख्य ध्यान मलबे में किसी और व्यक्ति की तलाश और उसे सुरक्षित बाहर निकालने पर है।
हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा भी जांच के दायरे में आ गई है। MCD के नोटिस में हादसे वाली जगह से ठीक सटी Building/House No. 13 का उल्लेख है। MCD ने इस इमारत को जर्जर और खतरनाक हालत में बताया है और वहां रहने वालों को परिसर खाली करने का आदेश दिया है। भवन संख्या 13 को नोटिस मिलने के तीन दिन के भीतर खाली करने के साथ उसे ढहाने का भी आदेश दिया गया है। तय समय में आदेश का पालन नहीं होने पर MCD खुद इमारत गिरा सकती है और इसका खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने चार मंजिल से ज्यादा की सभी अवैध निर्माण वाली इमारतों को तुरंत सील करने का आदेश भी दिया है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने कहा है कि ऐसी इमारतों को बनने देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें तत्काल बर्खास्तगी तक शामिल है।
हादसे को लेकर पुलिस ने FIR नंबर 153/2026 दर्ज की है। मामला साउथ कैंपस थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है। FIR में बिल्डिंग के मालिक हरिराम समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मामले में BNS की धारा 105, 290 और 125(a) के तहत केस दर्ज किया है। धारा 105 गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है, जबकि धारा 290 इमारत के निर्माण या मरम्मत में लापरवाही से जुड़ी है। धारा 125(a) ऐसे लापरवाह काम से संबंधित है, जिससे किसी की जान या सुरक्षा खतरे में पड़े और चोट पहुंचे।
पुलिस ने आरोपियों को ट्रेस करने के लिए कई टीमें बनाई हैं। दूसरी ओर, मलबे में किसी और व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। राहत-बचाव टीमें बेहद सावधानी से मलबा हटा रही हैं, ताकि किसी संभावित व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। अब इस पूरे मामले में दो मोर्चों पर कार्रवाई चल रही है—एक तरफ मलबे में जिंदगी की तलाश जारी है, तो दूसरी तरफ पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में जुटी है। जांच के साथ यह भी साफ होगा कि पांच मंजिला इमारत आखिर किन परिस्थितियों में गिरी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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