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ट्रंप का ड्रोन पर बड़ा टैरिफ वार, चीन पर 100% तक शुल्क, भारत पर क्या होगा असर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिसका सबसे ज्यादा असर चीन पर पड़ सकता है।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर ड्रोन के मामले में अमेरिका की निर्भरता घटाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने बाहर से आयात होने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और ड्रोन की सप्लाई चेन में चीन के दबदबे को कम करने के मकसद से लिया गया है। हालांकि, इसका असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहेगा। भारत से अमेरिका जाने वाले कमर्शियल और छोटे ड्रोन भी 25% टैरिफ के दायरे में आएंगे।

संवेदनशील ड्रोन पर 100%, छोटे ड्रोन पर 25% टैरिफ

व्हाइट हाउस के मुताबिक, 100% तक का टैरिफ उन संवेदनशील ड्रोन और उनके पार्ट्स पर लगाया जाएगा, जिनका वजन 25 किलोग्राम से ज्यादा है या जिनमें थर्मल इमेजिंग जैसी एडवांस सुरक्षा तकनीक मौजूद है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में नहीं आने वाले छोटे ड्रोन पर 25% का कम टैरिफ लगाया जाएगा। नए टैरिफ में ज्यादातर प्रावधान 3 सितंबर से लागू होने वाले हैं।

कागज पर यह नीति सभी देशों से आने वाले ड्रोन पर लागू होगी, लेकिन इसका सबसे बड़ा निशाना चीन है। इसकी वजह साफ है, ग्लोबल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट मार्केट में चीन का दबदबा है और अमेरिकी कमर्शियल ड्रोन बाजार में करीब 80% ड्रोन चीन से आते हैं। चीन की टेक कंपनी DJI (Da-Jiang Innovations) की दुनिया के कमर्शियल ड्रोन बाजार में 70% से ज्यादा हिस्सेदारी बताई गई है।

हॉलीवुड से खेती तक चीनी ड्रोन का इस्तेमाल

अमेरिका में चीनी ड्रोन सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। हॉलीवुड और कंटेंट क्रिएशन से लेकर रियल एस्टेट और कृषि क्षेत्र तक इनका इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में नए टैरिफ का असर अमेरिकी कंपनियों और उन कारोबारों पर भी पड़ सकता है, जो चीनी ड्रोन और उनके पार्ट्स पर निर्भर हैं।

व्हाइट हाउस का कहना है कि इन उपायों का मकसद अमेरिका में ड्रोन और उनके पार्ट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाना और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब चीन ने पिछले हफ्ते जबरन मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण अमेरिका के व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में ड्रोन के अमेरिकी एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया था। चीन का यह कदम अमेरिका द्वारा चीन समेत 59 देशों पर नए टैरिफ लगाए जाने के कुछ दिनों बाद आया था।

भारत के लिए चुनौती के साथ बड़ा कारोबारी मौका

भारत को ट्रंप की नई ड्रोन टैरिफ नीति में 100% वाले सबसे सख्त वर्ग में नहीं रखा गया है, लेकिन भारतीय ड्रोन एक्सपोटर्स के लिए भी चुनौती कम नहीं है। अमेरिका भारतीय कमर्शियल और छोटे ड्रोन पर 25% टैरिफ लगा रहा है, जिससे वहां भारतीय कंपनियों के उत्पादों की कीमत और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।

इसके बावजूद चीन के ड्रोन वर्चस्व को कम करने की अमेरिकी कोशिश भारतीय कंपनियों के लिए नए दरवाजे भी खोल सकती है। अगर अमेरिकी बाजार में चीनी ड्रोन की हिस्सेदारी घटती है, तो ideaForge, DroneAcharya और Garuda Aerospace जैसी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का मौका बन सकता है। यानी ट्रंप का यह फैसला भारत के ड्रोन उद्योग के लिए एक साथ चुनौती और बड़ा कारोबारी अवसर दोनों लेकर आया है।

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