
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश और हरियाणा में मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन संशोधन) के कार्यक्रम में बदलाव किया है। अब दोनों राज्यों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 जुलाई को प्रकाशित होगी, जबकि मतदाता सूची के फाइनल लिस्ट का प्रकाशन 3 अक्टूबर को होगा। आयोग ने इस संबंध में दोनों राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को अलग-अलग पत्र भेजे हैं।
पत्र के अनुसार, हरियाणा और आंध्र प्रदेश में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन का कार्य अब 24 जुलाई तक जारी रहेगा। पहले इसके लिए 14 जुलाई की समय-सीमा निर्धारित थी। दोनों राज्यों में मतदाता सूची का प्रारूप पहले 21 जुलाई को प्रकाशित किया जाना था, जिसे अब बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है।
दोनों राज्यों के लिए क्वालिफाइंग तारीख 1 जुलाई होगी, लेकिन ईसीआई ने तय किया है कि आंध्र प्रदेश और हरियाणा दोनों में वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट 31 जुलाई को पब्लिश किया जाएगा। भारत के चुनाव आयोग के अंडर सेक्रेटरी संदीप कुमार ने दोनों राज्यों के सीईओ को लिखे पत्र में कहा कि दोनों राज्यों में बीएलओ घर-घर जाकर 1 जून से 24 जुलाई के बीच सर्वे करेंगे।
चुनाव आयोग ने कहा कि पोलिंग स्टेशनों को सही ढंग से व्यवस्थित करने और उनकी री-अरेंजमेंट का काम 24 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। दावे और आपत्तियां दाखिल करने का समय 31 जुलाई से 30 अगस्त तक होगा। साथ ही, नोटिस देने या दावों और आपत्तियों के निपटारे का काम 31 जुलाई से 28 सितंबर के बीच किया जाएगा। आयोग ने कहा कि वोटर लिस्ट का फाइनल पब्लिकेशन 3 अक्टूबर को होगा।
दोनों राज्यों के सीईओ को लिखे पत्र में ईसीआई ने कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को आयोग के इस फैसले के बारे में बताया जाए और बदले हुए शेड्यूल का सभी उपलब्ध मीडिया के जरिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया जाए। राजनीतिक दलों को भी बदले हुए शेड्यूल के बारे में लिखित रूप में जानकारी दी जाए।
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इससे पहले चुनाव आयोग ने निर्देश जारी किए थे कि जो मौजूदा वोटर पिछले एसआईआर में शामिल नहीं थे, उन्हें वोटर लिस्ट में बने रहने के लिए अपने माता-पिता की सर्वे डिटेल्स अटैच करना जरूरी होगा। आयोग ने बयान में कहा कि वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए फॉर्म 6 भरने वाले नए वोटरों को भी अपने माता-पिता की एसआईआर डिटेल्स अटैच करनी होगी। बिहार एसआईआर के दौरान भी ऐसे ही डिक्लेरेशन फॉर्म मांगे गए थे, क्योंकि इनसे नए वोटरों के लिए डॉक्यूमेंटेशन कम करने में मदद मिली थी।
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