
सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग का हलफनामा भ्रामक, कपटपूर्ण और दोहरी नीयत से भरा
एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग ने तथ्यों को लेकर ‘शब्दों का खेल’ खेला
झूठ बोलने की शुरुआत करते ही इंसान अपने ही बुने जाल में उलझता चला जाता है
कांग्रेस ने आज आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल हलफनामा भ्रामक, कपटपूर्ण और दोहरी नीयत से भरा है। साथ ही यह खुद आयोग की साख के लिए बहुत नुकसानदेह है। पार्टी ने कहा कि झूठ बोलने की शुरुआत करते ही इंसान अपने ही बुने जाल में उलझता चला जाता है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग ने तथ्यों को लेकर ‘शब्दों का खेल’ खेला है और इस संबंध में उसके फैसले सर्वसम्मति से नहीं, बल्कि एकतरफा लिए गए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आयोग ने साफ तौर पर धोखा देने और शब्दों की बाजीगरी करने की कोशिश की है। पहले उसने दावा किया कि फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए नए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था, जबकि बाद में कोर्ट ने खुद इस दावे का खंडन कर दिया।
रमेश ने आगे कहा, अब चुनाव आयोग दावा कर रहा है कि नया डिक्लेरेशन फॉर्म अलग है और फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया। लेकिन यह भी एक धोखा है- क्योंकि इस अनिवार्य डिक्लेरेशन को भरे बिना ऑनलाइन फॉर्म 6 जमा ही नहीं किया जा सकता था। तीसरा, आयोग का अपना स्टैंड लगातार बदल रहा है। 26 सितंबर 2026 को उसने कहा था कि यह डिक्लेरेशन फॉर्म 6 के साथ जोड़ा गया है। अब वह कह रहा है कि यह फॉर्म 6 का हिस्सा नहीं है। आयोग इस तरह रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टोरल रूल्स, 1960 के खुलेआम उल्लंघन पर पर्दा नहीं डाल सकता।
जयराम रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) पर एसआईआर से जुड़े फैसले ‘एकतरफा’ तरीके से लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि आयोग अब यह दावा करके मुद्दे को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रहा है कि एसआईआर से जुड़े प्रमुख आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों ने औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी। लेकिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने सीईसी के आदेशों पर हो रहे गंभीर उल्लंघनों और गैरकानूनी कार्रवाइयों के खिलाफ आधिकारिक रिकॉर्ड में आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। यहां तक कि दोनों चुनाव आयुक्तों को इन फैसलों की जानकारी भी नहीं दी गई थी और उन्हें इनके बारे में खबरों से पता चला। यह सर्वसम्मति से फैसले लेना नहीं, बल्कि एकतरफा निर्णय लेने का मामला है।
उन्होंने ‘ईसीआईनेट’ के जरिये मतदाता सूचियों पर नियंत्रण के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए। रमेश ने कहा कि मतदाता सूचियों पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने और वैधानिक अधिकार रखने वाले इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ईआरओ) के फैसलों को दरकिनार करने के लिए ईसीआईनेट के इस्तेमाल का मुद्दा दोनों चुनाव आयुक्तों ने आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कराया था। लगभग हर उस राज्य से ईआरओ के फैसलों को पलटे जाने के सबूत सामने आए हैं, जहां एसआईआर हुई है। इनमें गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्य शामिल हैं।
जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने बार-बार चिंता जताई थी कि आईटी डिवीजन का कामकाज अपारदर्शी है, वह अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करता है और बिना अनुमति के फैसले लेता है। उन्होंने ईसीआईनेट और आईटी डिवीजन के कामकाज को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा था। इसके बाद से आईटी डिवीजन में फैली अव्यवस्था को लेकर कई और खुलासे सामने आए हैं। लेकिन न तो उसके कामकाज में कोई बदलाव हुआ है और न ही इन मुद्दों पर कोई कार्रवाई की गई है।
कांग्रेस महासचिव ने एसआईआर प्रक्रिया में अनेक अनियमितताएं सामने आने का दावा करते हुए कहा कि कई राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में कई गैरकानूनी कार्रवाइयां और नियमों के उल्लंघन सामने आए हैं। लगभग हर राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 का दुरुपयोग किया गया है।
रमेश ने यह भी दावा किया कि आयोग के हलफनामे में मीडिया में सामने आई कई जानकारियों की सत्यता से इनकार नहीं किया गया है और इसे उन्होंने अनियमितताओं की पुष्टि बताया। रमेश ने कहा कि हलफनामे में मीडिया के बड़े हिस्से में लगातार सामने आ रहे खुलासों की सच्चाई से इनकार नहीं किया गया है। यह सीईसी द्वारा की गई गंभीर गड़बड़ियों और कानूनी उल्लंघनों की एक और पुष्टि है।
कांग्रेस नेता ने अंत में कटाक्ष करते हुए कहा कि झूठ बोलने की शुरुआत करते ही इंसान अपने ही बुने जाल में उलझता चला जाता है। और जब लंबे समय तक यही सिलसिला चलता रहता है, तो आखिरकार उसका झूठ किसी न किसी तरीके से सामने आने लगता है।
इससे पहले निर्वाचन आयोग ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और सीईसी ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया कानून के तहत अधिकृत है और इससे संबंधित आदेशों को आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।
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