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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ की आंखोंदेखी: ड्रोन हमलों के बीच एक स्वतंत्र पत्रकार ने जाना इस रास्ते का हाल

एक कनाडाई वकील-पत्रकार का कहना है कि एक घंटे की समुद्री यात्रा के दौरान उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुजके ईरानी हिस्से में फंसे लगभग 90 जहाजों को गिना।

स्ट्रे़ट ऑफ होर्मुज में रिपोर्टिंग करने गए स्वतंत्र पत्रकार दिमित्री लास्करिस
स्ट्रे़ट ऑफ होर्मुज में रिपोर्टिंग करने गए स्वतंत्र पत्रकार दिमित्री लास्करिस 

दिमित्री लास्करिस—एक कनाडाई वकील, पत्रकार और यूट्यूबर हैं, जो स्वतंत्र पत्रकारों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह के साथ हैं। वे रविवार, 29 मार्च 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में एक घंटे की क्रूज़ यात्रा पर गए और उन्होंने स्ट्रेट के ईरानी हिस्से में फंसे हुए 90 जहाज़ों और टैंकरों को गिना। उन्होंने इसका वीडियो बनाया और इसे यूट्यूब पर साझा किया। इसमें उन्होंने बताया कि यह तो संख्या थी जिसे वे अपनी आँखों' से देखकर गिन पाए।

पिछले 10 दिनों से युद्ध से तबाह ईरान की यात्रा करते हुए, स्वतंत्र 'विदेशी' पत्रकारों का एक समूह युद्ध के प्रभावों को जानने-समझने और उनको रिकॉर्ड करने के लिए इलाके का दौरा कर रहा है। इस दौरान वे लोगों से बातचीत भी रिकॉर्ड कर रहे हैं। कनाडा के दिमित्री लास्करिस ने सोमवार, 30 मार्च को एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उस क्रूज़ की झलक थी जो इस समूह ने पिछले दिन ईरानी तट के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में किया था। उन्हें होर्मुज़ आईलैंड पर जाने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि वहां के पोर्ट पर ड्रोन हमला हुआ था।

यह क्रूज़ मुश्किल से एक घंटे तक चला, जो उन्हें शुरू में दी गई 20 मिनट की अनुमति से ज़्यादा था। यह सावधानी कुछ हद तक इसलिए ज़रूरी थी क्योंकि पिछले कुछ दिनों में इस समूह पर भी ड्रोन हमले हुए थे और पिछले सप्ताह ही लेबनान में इज़रायली हमलों में दो पत्रकारों की जानबूझकर हत्या कर दी गई थी।

समूह के एक अन्य सदस्य से, जिससे लास्करिस ने वीडियो में अपने अनुभव बताने को कहा, उसने कहा कि उसे यह देखकर हैरानी हुई कि अमेरिका और इज़रायल बार-बार उन जगहों पर बमबारी कर रहे थे, जहां उन्होंने पहले भी बमबारी की थी—जैसे बुशेहर, मिनाब और बंदर अब्बास—और यह सब ठीक पत्रकारों के समूह के दौरे के बाद या उनके सामने ही हो रहा है। उसने हैरानी जताते हुए कहा कि आखिर वे किसी रेडियो स्टेशन, मौसम निगरानी केंद्र, किसी सार्वजनिक पार्क और एक होटल पर फिर से बमबारी क्यों करेंगे, जिन पर वे पहले भी बमबारी कर चुके थे। उसे यह डर सता रहा था कि असल में इस समूह को ही निशाना बनाया जा रहा है। उसने सवाल किया कि यह महज़ एक इत्तेफ़ाक तो बिल्कुल नहीं हो सकता।

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लास्करिस ने जिन 90 जहाजों को गिना, उनके अनुसार, वे उत्तर और दक्षिण दोनों दिशाओं की ओर इशारा कर रहे थे। इससे संकेत मिलता है कि रविवार को खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाज—जिनमें संभवतः भोजन सामग्री और अन्य ज़रूरी सामान लदा था—और साथ ही खाड़ी से तेल लेकर बाहर जाने वाले टैंकर भी फंसे हुए थे। उन्होंने याद दिलाया कि बंदर अब्बास के गवर्नर ने दावा किया था कि यह स्ट्रेट 'ईरान के दोस्तों' के लिए खुला है, और सिर्फ अमेरिका, इज़राइल और इन दोनों देशों के सहयोगियों के जहाजों के लिए बंद है। ईरानियों ने ज़ोर देकर कहा कि पश्चिमी मीडिया की रिपोर्टों के उलट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पूरी तरह से खुला हुआ है।

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इस बीच, खबर है कि ईरान ने "होर्मुज़ लॉ" (इस इलाके के लिए नया कानून) बनाने के लिए एक मसौदा तैयार किया है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के लिए एक औपचारिक टोल सिस्टम बनने की उम्मीद है। इस कानून के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में जहाज़ों के आवागमन और प्रदूषण पर शुल्क लगाया जाएगा, एक "क्षेत्रीय कोष" बनाया जाएगा और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर लंबे समय तक चलने वाली टोल प्रणाली को औपचारिक रूप दिया जाएगा। जहां एक ओर अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर इन टोलों को "अवैध" और "अस्वीकार्य" बताया है, वहीं ईरान का तर्क है कि ये टोल, स्वेज़ और अन्य नहरों से गुज़रने के दौरान लिए जाने वाले शुल्क की तरह ही, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुरूप हैं।

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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम तेल चोकपॉइंट्स में से एक है। यहाँ से हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल गुज़रता है—जो 2024-2025 में दुनिया भर में होने वाली पेट्रोलियम की कुल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है। तेल की आपूर्ति का ज़्यादातर हिस्सा—लगभग 80 प्रतिशत—मुख्य रूप से सऊदी अरब, यूएई, इराक, कुवैत, कतर और ईरान से आता है, और आमतौर पर एशियाई देशों की ओर जाता है। हालांकि, इसमें किसी भी तरह की रुकावट से दुनिया भर में तेल की भारी कमी हो सकती है और कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती हैं, क्योंकि इसे बाईपास करने के रास्ते बहुत सीमित हैं।

इन रिपोर्टों के बीच कि अमेरिका का अब मुख्य लक्ष्य 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' को 'खोलना' है और वह ज़मीनी हमले की तैयारी कर रहा है, रणनीतिक विशेषज्ञों के बीच ऐसी योजनाओं की व्यावहारिकता को लेकर संदेह बढ़ता जा रहा है। जॉन मियरशाइमर ने बताया कि इसके पुख्ता कारण हैं कि आज अमेरिकी नौसेना के सभी बड़े जहाज़ खाड़ी से काफ़ी दूर खड़े हैं।

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उन्होंने एक ब्लॉगपोस्ट में लिखा, “मुझे समझ नहीं आता कि हमारे पास ज़मीनी सेना का कोई गंभीर विकल्प कैसे हो सकता है। शायद थोड़ी किस्मत से हम फ़ारस की खाड़ी में कोई छोटा-सा द्वीप कब्ज़े में ले लें, लेकिन मुझे नहीं लगता कि हम उसे अपने पास रख पाएंगे; और अगर रख भी लिया, तो भी इससे युद्ध की दिशा पर शायद ही कोई असर पड़ेगा। इस प्रक्रिया में, एक हारे हुए मकसद के लिए कई अमेरिकी अपनी जान गँवा देंगे,”

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