
समाजवादी पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि महंगाई और बेरोजगारी जैसी मुख्य समस्याओं को हल करने में नाकाम रहीं ये सरकारें 'प्रोपेगैंडा' और 'इवेंट आधारित राजनीति' पर निर्भर हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि रसोई गैस से जुड़े मुश्किल हालात को देखते हुए उनके परिवार ने घर पर पहले से ही मिट्टी के दो पारंपरिक चूल्हों का इंतजाम कर लिया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में कहा कि बीजेपी के शासन में लोग खाना पकाने वाली गैस जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए कतारों में खड़े हैं। रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और उसकी आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतों से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति में किए गए बदलावों के हिसाब से उत्पादन की सही योजना नहीं बनाई गई।
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अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने पहले भी लोगों को सलाह दी थी कि किसी संभावित संकट को देखते हुए वे गोबर के उपले, जलावन (लकड़ियां) और कोयले के चूल्हे जैसे विकल्प तैयार रखें। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने आपसे कहा था कि गोबर के उपले, जलावन (लकड़ियां) और कोयले के चूल्हे तैयार रखें... लेकिन आपने मेरी सलाह पर ध्यान नहीं दिया। जहां तक हमारी बात है, हमने अपने घर के लिए पहले ही मिट्टी के दो चूल्हे खरीद लिए हैं, क्योंकि खाना पकाने वाली गैस को लेकर हर किसी को मुश्किलों का सामना करना ही पड़ेगा।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात की वजह से लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक तरीकों पर ज्यादा से ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह समस्या बड़े पैमाने पर फैली हुई है और किसी खास तबके तक ही सीमित नहीं है। रसोई गैस की किल्लत की वजह से लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले असर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे उद्यमी और व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, खासकर वे लोग जो रोज कमाते-खाते हैं। आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के गलत फैसलों की वजह से नागरिकों को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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एसपी प्रमुख ने राज्य सरकार द्वारा हाल में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) की पूरी जांच की भी मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई समझौते ऐसी कंपनियों के साथ किए गए हैं जिनकी आर्थिक पृष्ठभूमि मजबूत नहीं है और इन समझौतों का मकसद सिर्फ निवेश का एक झूठा विमर्श खड़ा करना है।
प्रौद्योगिकी के बारे में उन्होंने कहा कि भारत में खेती के क्षेत्र में कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल करने की बहुत ज्यादा संभावना है, खासकर भविष्य का अनुमान लगाने और खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए.... लेकिन सरकार इसके लिए उपयुक्त माहौल बनाने या जरूरी प्रशिक्षण देने में नाकाम रही है। उन्होंने बीजेपी पर बेतहाशा धन खर्च कर नकारात्मक अभियान के जरिए विरोधियों की छवि खराब करने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह शासन करने के बजाय ‘प्रोपेगैंडा’ पर ज्यादा निर्भर रहती है।
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पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत की वैश्विक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्र की गलत आर्थिक और कूटनीतिक नीतियों की वजह से देश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने का 'एक मौका गंवा दिया है।' जंगली जानवरों को लेकर उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि जंगलों की कटाई और गैर-कानूनी खनन की वजह से जानवर जंगलों से बाहर आने पर मजबूर हो गए हैं, जिससे गांवों में लोगों और किसानों पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीतापुर जैसे जिलों में जंगली जानवरों के हमले में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि वन विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
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