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लोकसभा में आज FCRA संशोधन बिल पर चर्चा, विधेयक पास कराने की तैयारी, विपक्ष के हंगामे के आसार

लोकसभा में आज FCRA संशोधन बिल 2026 पर चर्चा और पारित करने की तैयारी है। वहीं, विपक्ष और अल्पसंख्यक संगठनों ने इसके खिलाफ विरोध तेज कर दिया है और इसे असंवैधानिक बताया है।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

विपक्ष और अल्पसंख्यक समुदायों के तीखे विरोध के बीच सरकार आज लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA) को बहस और पारित कराने के लिए पेश करने जा रही है।

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क्या है बिल का प्रावधान?

यह संशोधन बिल विदेशी फंड से जुड़े कानूनों को सख्त बनाने का प्रस्ताव करता है। इसके तहत, अगर किसी संस्था का विदेशी चंदा लेने का लाइसेंस रद्द, निलंबित या खत्म हो जाता है, तो उस संस्था द्वारा विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों को सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है।

ऐसे मामलों में यह संपत्तियां “निर्धारित प्राधिकरण” के पास स्थायी रूप से चली जाएंगी, खासकर तब जब संस्था तय समय में अपना लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराती।

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विपक्ष, CBCI और नेताओं का कड़ा विरोध

इस विधेयक को लेकर कांग्रेस, CPI(M), CPI और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ऑफ़ इंडिया (CBCI) ने भी इसे नागरिक समाज को प्रभावित करने वाला कदम बताया है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केरल में एक चुनावी बैठक के दौरान इस मुद्दे को उठाया। वहीं, CPI(M) के महासचिव एमए बेबी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग-अलग पत्र लिखकर बिल वापस लेने की मांग की है।

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ये बिल अल्पसंख्यकों और NGOs को बनाता है निशाना: वेणुगोपाल

कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस बिल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह ईसाइयों, अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को निशाना बनाता है।

उन्होंने कहा कि जो संगठन देश में अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें इस कानून के जरिए दंडित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस विधेयक का संसद के अंदर और बाहर विरोध करेगी और इसे “असंवैधानिक” व “अल्पसंख्यक विरोधी” बताया।

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केरल CM की चेतावनी

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी इस संशोधन पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इससे समाज के एक वर्ग में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है और केंद्र सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने केंद्र के रुख को खतरनाक बताया और कहा कि यह किसी भी समुदाय को अलग-थलग करने वाला है।

बुधवार बजट सत्र का दूसरा आखिरी दिन है, जबकि 2 अप्रैल को सत्र का समापन तय है। साथ ही ऐसी खबरें हैं कि सरकार सत्र को स्थगित करने के बजाय विधानसभा चुनावों के बाद फिर से संसद बुला सकती है।

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25 मार्च को पेश हुआ था बिल

यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और इसका उद्देश्य भारत में विदेशी चंदे के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है। आज इसे लोकसभा में बहस और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।    

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