
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी पर पलटवार किया है। जयराम रमेश ने कहा कि यह बयान उनकी हताशा का स्पष्ट संकेत है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ से सावधान रहना होगा तथा उनकी पहचान कर उन्हें अल-थलग करना होगा। उनके इसी बयान को लेकर कांग्रेस नेता ने निशाना साधते हुए कहा कि यह यूं ही नहीं है कि उन्हें ‘एंटायर पोलिटकल साइंस’ में एमए (मास्टर एब्यूजर) कहा जाता है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले अपने विरोधियों को ‘शहरी नक्सल’ कहा और अब उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उनकी हताशा का ‘स्पष्ट संकेत’ है।
रमेश ने दावा किया कि जिन लोगों को प्रधानमंत्री ‘शहरी नक्सल’ या अब ‘दिमागी नक्सल’ बता रहे हैं, उनकी ओर से उठाई गई मांगों या विचारों को सरकार बाद में स्वीकार करती रही है।
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि यह यूं ही नहीं है कि उन्हें ‘एंटायर पोलिटकल साइंस’ में एमए (मास्टर एब्यूजर) कहा जाता है।
वहीं जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने भी पीएम मोदी के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "अभी किसी को पहचानने की जरूरत नहीं है। PM मोदी खुद हमें बताएंगे। कौन मानसिक रूप से पागल है? कौन नक्सली है? PM मोदी को बेहतर पता होगा। उन्हें बिहार और देश में घूमकर पहचान करनी चाहिए कि किसकी सोच कैसी है। हो सकता है कि जिन्हें वह नक्सली या मानसिक रूप से पागल कह रहे हैं, वे असल में उनकी अपनी पार्टी BJP में हों।"
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ से सावधान रहना होगा तथा उनकी पहचान कर उन्हें अल-थलग करना होगा।
पीटीआई के इनपुट के साथ
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए