केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने पाकिस्तान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के मद्देनजर सभी स्थानांतरण और नियुक्ति आदेशों को स्थगित करने के साथ कर्मियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को भी स्थगित कर दिया है। अर्धसैनिक बल ने अपनी दो दर्जन से अधिक कंपनियों को, जिनमें लगभग 2,400 कर्मी हैं, बीएसएफ और सेना के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जम्मू-कश्मीर भेजने का निर्देश दिया है।
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आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को ‘पीटीआई’ को बताया कि बल के मुख्यालय ने आदेश दिया है कि देश के पश्चिमी और उत्तरी मोर्चे पर उभरती सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर सभी स्थानांतरण और नियुक्ति आदेशों को स्थगित रखा जाए तथा अधिकारी और कार्मिक अपनी तैनाती के स्थान पर उपस्थित रहें।
उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ ने जवानों के लिए आयोजित किए जाने वाले कई निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी जून तक स्थगित कर दिया है और अधिकारियों ने निर्देश जारी किए हैं कि जवानों को किसी भी संभावित आपात स्थिति के लिए तैनाती स्थल पर ही रोका जाए और अनावश्यक यात्रा से बचा जाए।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही सीआरपीएफ और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) जैसे बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी से सभी छुट्टियां रद्द करने और पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य हमले में वृद्धि के मद्देनजर सैनिकों की अधिकतम उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है।
सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) जी.पी. सिंह सहित बल के शीर्ष अधिकारियों के भी जम्मू कश्मीर का दौरा करने की उम्मीद है, जो बल के तीन मुख्य युद्ध क्षेत्रों में से एक है। महानिदेशक सिंह वर्तमान में लगभग 20 दिनों से छत्तीसगढ़ में डेरा डाले हुए हैं। इसके अभियान के दो अन्य क्षेत्र हैं- वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित राज्यों में नक्सल रोधी और पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियान।
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अधिकारियों के अनुसार, सीआरपीएफ के महानिदेशक 21 अप्रैल से तेलंगाना की सीमा पर चलाए जा रहे सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान की निगरानी के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हैं। उन्होंने कहा, “डीजी के जल्द ही जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने और बल के अभियानों तथा तैनाती की समीक्षा करने की उम्मीद है। उनके सेना कमांडरों और पुलिस एवं प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से भी मिलने की उम्मीद है।”
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जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ की लगभग 65 बटालियन हैं, जिनमें लगभग 65,000-66,000 कर्मी हैं, जो आतंकवाद विरोधी कार्यों और स्थानीय पुलिस को कानून-व्यवस्था में सहायता प्रदान करते हैं। पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादी हमले के बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) जैसे अन्य बलों के प्रमुख पहले ही जम्मू-कश्मीर का दौरा कर चुके हैं। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हो गयी थी।
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