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झारखंड: जहां लिखी गई ‘पथेर पांचाली’, उस जगह को बचा लीजिए ‘सरकार’

जमशेदपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर घाटशिला के जिस गांव में बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय ने अपना सर्वश्रेष्ठ उपन्यास ‘पथेर पांचाली’ (सड़क का गीत) लिखा, उस गांव के लोग और स्थानीय प्रशासन आमने-सामने है।

फोटो: मोहम्मद सरताज आलम
फोटो: मोहम्मद सरताज आलम 

अपने भाषणों में अक्सर अशुद्ध हिंदी बोलने वाले झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार अब बांग्ला साहित्य की धरोहर बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय की यादों को मिटाने पर तुली है। जमशेदपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर घाटशिला के जिस गांव में बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय ने अपना सर्वश्रेष्ठ उपन्यास ‘पथेर पांचाली’ (सड़क का गीत) लिखा, उस गांव के लोग और स्थानीय प्रशासन आमने-सामने है। गांव के कुछ लोग पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त (जिला दंडाधिकारी) के कार्यालय परिसर में कल से बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे हैं, ताकि सरकार उस जगह को नहीं तोड़े, जहां आदिवासियों का जाहेर थान (पूजा स्थल) है।

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ग्रामीणों का दावा है कि इसी जगह पर बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय ने ‘पथेर पांचाली’ और ‘अपराजितो’ के कई अंश लिखे। लिहाजा, बंगालियों में यह स्थान पर्यटन स्थल के तौर पर प्रसिद्ध है। झारखंड की बीजेपी सरकार अब उसी जगह पर पंचायत भवन बनाना चाहती है, जिसको लेकर ग्रामीण आक्रोशित हैं। इसके बावजूद सरकार के प्रतिनिधि या उसके प्रशासनिक नुमाइंदों ने अभी तक उन युवाओं से बातचीत नहीं की है, जो इसे बचाने की मांग के साथ भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

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यह विवाद पिछले दो साल से चला आ रहा है। पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला प्रखंड के फुलडुंगरी गांव में साल 2017 में सरकार ने पावड़ा पंचायत का सचिवालय (पंचायत मंडप) बनवाने का निर्णय लिया। वहां के ग्राम प्रधान रामचंद्र हेंब्रम ने बताया कि तब घाटशिला के अंचलाधिकारी (सीओ) और भू-अर्जन विभाग के अधिकारियों ने इसके लिए गांव की एक जमीन तय की। अक्टूबर-2017 में ग्राम प्रधान और सैकडों ग्रामीणों की मौजूदगी में वहां शिलान्यास भी कर दिया। कुछ महीने बाद ग्रामीणों की जानकारी के बगैर पंचायत मंडप के निर्माण स्थल को बदल दिया गया। अधिकारियों ने अब जो जगह चुनी, वहां जाहेर थान (आदिवासियों का पूजा स्थल) था। आदिवासी वहां पूजा करने आते हैं और बाहा पर्व के मौके पर वहां विशाल मेला लगता है। तब वहां कई हजार लोगों की भीड़ होती है।

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बंगाली पर्यटक मानते हैं कि इसी जगह पर पेड़ के नीचे बैठकर बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय ने ‘पथेर पांचाली’ और उसका सिक्वल ‘अपराजितो’ लिखा। हालांकि, अपराजितो लिखने के क्रम में ही नवंबर 1950 में इसी गांव में उनका देहांत हो गया। यहां मौजूद उनका घऱ आज भी धरोहर के तौर पर सुरक्षित है। सर्दियों के मौसम में यहां बंगाली समुदाय के पर्यटकों की भीड़ जमती है। तब वे लोग इस घर के साथ-साथ वह जगह भी देखने जाते हैं, जहां ये दोनों उपन्यास लिखे गए। बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय का निधन हर्ट अटैक से सिर्फ 56 साल की उम्र में हुआ था। तब वे अपराजितो लिख रहे थे। निधन के बाद उनके बेटे तारादास ने उस उपन्यास को पूरा किया। इन दोनों उपन्यासों का कई भाषाओं में उनका अनुवाद भी हुआ। पथेर पांचाली पर मशहूर फिल्मकार सत्यजीत राय ने फिल्म बनायी और उसके कुछ हिस्से की शूटिंग भी इस इलाके में हुई। बाद में अपराजितो और उनके कुछ और उपन्यासों पर भी बांग्ला और हिंदी में फिल्में बनायी गईं। उऩका उपन्यास अरण्यक भी बहुत चर्चित है। उन्होंने अपनी जिंदगी में कुल सोलह उपन्यास और 200 लघु कथाएं लिखी थीं।

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लिहाजा, ग्रामीणों ने इन तर्को के साथ घाटशिला के सीओ के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करायी। ग्राम प्रधान रामचंद्र हेंब्रम ने सीओ को लिखे पत्र की प्रति राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को भी भेजी। तब सीओ ने गांव के स्कूल के बगल में स्थित एक खाली जमीन का जिक्र करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को चिट्ठी लिखी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि जाहेर थान के बजाय स्कूल के बगल वाली जमीन पर पंचायत मंडप बनवाया जा सकता है। बीडीओ ने यह पत्र उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को भेजा। गांव के लोगों ने पिछले साल अगस्त महीने में बीडीओ कार्यालय के समक्ष भी भूख हड़ताल की। तब अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांग पर सकारात्मक पहल का आश्वासन देकर भूख हड़ताल तुड़वा दी। वहां चल रहा निर्माण कार्य भी रोक दिया गया। लेकिन, कई महीने से रुका हुआ काम पिछले दिनों फिर से शुरू करा दिया गया, तब ग्रामीण आक्रोशित हो उठे।

गांव के हरिराम टुडू ने बताया कि तब हमलोगों ने डीसी कार्यालय पर भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया। इसके बाद मनसा राम हांसदा और सुखदा मुर्मू नामक दो युवकों ने शुक्रवार (30 अगस्त) की सुबह से बेमियादी भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनके समर्थन में और कई लोग बी बैठे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी कोई सुध नहीं ली है। इससे यह विवाद और गहराता जा रहा है।

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