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कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, मानहानि मामले में नहीं मिली राहत, याचिका पर सुनवाई से इनकार

कंगना ने किसान आंदोलन के दौरान अपने रिट्वीट में महिंदर कौर की फोटो शेयर की थी और लिखा था कि "यह वही बिलकिस बानो दादी है जो शाहीन बाग प्रदर्शन का हिस्सा थी।" इसके बाद महिंदर कौर ने कंगना के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, मानहानि मामले में नहीं मिली राहत, याचिका पर सुनवाई से इनकार
कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, मानहानि मामले में नहीं मिली राहत, याचिका पर सुनवाई से इनकार फोटोः IANS

किसान आंदोलन के दौरान एक महिला किसान के मानहानि के मामले में फिल्म अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष कोर्ट ने शुक्रवार को शिकायत रद्द करने से जुड़ी उनकी याचिका पर सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया, जिसके बाद कंगना ने अपनी याचिका वापस ले ली। मामला 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान कंगना रनौत द्वारा एक महिला किसान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का है।

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बीजेपी सांसद कंगना पर आरोप है कि उन्होंने महिला किसान महिंदर कौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। कंगना ने किसान आंदोलन के दौरान अपने रिट्वीट में महिंदर कौर की फोटो शेयर की थी और लिखा था कि "यह वही बिलकिस बानो दादी है जो शाहीन बाग प्रदर्शन का हिस्सा थी।" इसके बाद महिंदर कौर ने कंगना के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। कंगना ने इस शिकायत को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा, “हम आपके ट्वीट पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, इससे ट्रायल पर असर पड़ेगा। ये सिर्फ एक साधारण री-ट्वीट नहीं था, इसमें आपकी टिप्पणी भी शामिल थी।” इसके बाद कंगना के वकील ने कोर्ट से याचिका वापस ले ली।

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इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 1 अगस्त को कंगना रनौत की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता एक सेलिब्रिटी हैं और उन पर गंभीर आरोप हैं कि उनके रीट्वीट में लगाए गए झूठे और मानहानिकारक आरोपों से प्रतिवादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इससे न केवल उनकी छवि दूसरों की नजरों में कमजोर हुई है, बल्कि उनकी खुद की नजर में भी धक्का लगा है। इसलिए प्रतिवादी द्वारा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शिकायत दर्ज करना दुर्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता।

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