
आयुर्वेद में सदियों से दुर्लभ जड़ी-बूटियों से गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज होता आ रहा है। आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियां मौजूद हैं जो शारीरिक कमजोरी और जोड़ों के लिए दवा की तरह काम करती हैं।
ऐसी ही एक औषधि है केवकंद, जिसके पौधे की जड़, तना और पत्तियां भी गुणों से भरपूर होती हैं। जंगली अदरक को केवकंद, केमुआ और केमुक के नाम से भी जाना जाता है और ये भारत समेत विदेशों में भी आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसके चमत्कारी गुणों के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं।
वैसे तो केवकंद के फूल से लेकर पत्तियों का इस्तेमाल आयुर्वेद में होता आया है, लेकिन उसकी कंद (जंगली अदरक) या जड़ कई रोगों में लाभकारी है। आयुर्वेद में इसकी कंद को वात और कफ दोष को संतुलित करने वाला माना गया है। इसके कंद की सब्जी और सूप बनाकर भी पिया जाता है और सर्दियों में ज्यादा सेवन किया जाता है क्योंकि उसकी तासीर बेहद गर्म होती है।
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अगर किडनी में पथरी की परेशानी है या फिर किडनी के कार्य करने की क्षमता कम हो गई है, तब जंगली अदरक का काढ़ा उपयोगी होता है। इसके काढ़े के सेवन से बार-बार पेशाब में जलन या बूंद-बूंद पेशाब आने की समस्या में कमी आई है और संक्रमण का खतरा भी कम होता है। इसके अलावा, जंगली अदरक का चूर्ण भी बाजार में आसानी से मिल जाता है, जिसके सेवन से शरीर की सूजन और गठिया के दर्द में राहत मिलती है।
अगर जंगली अदरक को भूनकर उसमें शर्करा और इमली मिलाकर चटनी बनाई जाती है, तो इसका सेवन पेचिश, दस्त और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही खासकर बच्चों में पेट में कीड़े होने की परेशानी ज्यादा देखी जाती है। ऐसे में बच्चों को जंगली अदरक के रस को शहद में मिलाकर देने से आराम मिलेगा और पाचन तंत्र भी ठीक से काम करेगा।
मधुमेह के रोगी भी जंगली अदरक का सेवन कर सकते हैं। जंगली अदरक का काढ़ा बनाकर पिया जा सकता है और इसके पत्तों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि जंगली अदरक का सेवन करने से पहले एक बार चिकित्सक की सलाह जरूर लें। जहां केवकंद के इस्तेमाल के फायदें हैं, वहीं कुछ नुकसान भी हैं।
केवकंद की तासीर गर्म होती है, जो शरीर में गर्मी और जलन भी पैदा कर सकती है, इसलिए इसके ज्यादा सेवन से बचना चाहिए। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। किसी भी गंभीर बीमारी, मधुमेह, या किडनी रोग में उपयोग से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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