
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मनरेगा की जगह लाए गए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ का विरोध करते हुए देश के ग्रामीणों को पत्र लिखा है जिसमें दावा किया है कि देश की ग्रामीण आबादी के लिए काम अब ‘रेवड़ी’ बन जाएगा, जिसे सरकार चाहेगी, उसे काम मिलेगा और अब यह लोगों का अधिकार नहीं रह जाएगा। ग्रामीण लोगों को लिखे पत्र में कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं ने आरोप लगाया है कि उनके काम करने का अधिकार चोरी किया जा रहा है और इस नए कानून के माध्यम से राज्यों पर वित्तीय बोझ डाला जा रहा है।
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खड़गे और राहुल गांधी द्वारा लिखा गया पत्र कांग्रेस के उस देशव्यापी "मनरेगा बचाओ संग्राम" का हिस्सा है, जिसमें पहले के कानून की बहाली की मांग की गई है। यह अभियान 10 जनवरी को शुरू किया गया था और 25 फरवरी तक जारी रहेगा। कांग्रेस ने अपने सभी राज्य इकाई प्रमुखों से इस पत्र का सभी स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करने के बाद इसे ग्रामीण लोगों के बीच वितरित करवाने के लिए कहा है।
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पत्र में कहा गया है कि 20 साल पहले मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) बनाकर काम करने के संवैधानिक अधिकार को जीवंत कर दिया था। दोनों नेताओं के मुताबिक, मनरेगा ने 180 करोड़ से अधिक दिनों का काम सृजित किया है, गांव में टंकियां और सड़कों जैसी लगभग 10 करोड़ संपत्तियां बनाई हैं और ग्राम स्तर की परियोजनाओं पर निर्णय लेने के लिए ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाकर पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत किया गया।
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पत्र में कहा गया है, ‘‘काम करने का आपका अधिकार चुराया जा रहा है। पहले पूरे भारत में हर ग्रामीण परिवार के लिए काम एक कानूनी गारंटी थी। किसी भी ग्राम पंचायत में काम मांगने वाले किसी भी परिवार को 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराया जाना था। अब यह अधिकार नहीं होगा बल्कि मोदी सरकार के फैसले के अनुसार 'रेवड़ी' दी जाएगी।’’
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कांग्रेस नेताओं ने पत्र में कहा, ‘‘बिना किसी गारंटी के वार्षिक संशोधन के साथ वेतन मनमाने ढंग से निर्धारित किया जाएगा। यह योजना फसल के मौसम के दौरान अमल में नहीं होगी, इसलिए श्रमिकों को अन्य काम को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जाएगा।’’ खड़गे और राहुल गांधी ने दावा किया कि ग्राम पंचायतों की शक्तियां ठेकेदारों को सौंप दी जाएंगी।
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