
जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्वागत किया है। खड़गे ने प्रधान के इस्तीफे को करोड़ों युवाओं की जीत बताया है। खड़गे ने कहा कि भारत के ‘छात्रों की गूंज’ आख़िरकार अंहकारी सत्ता की दहलीज तक पहुंच गई। ये हमारे करोड़ों युवाओं की जीत है जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़क पर आवाज उठाई। ये सत्य की जीत है और मोदी जी के हठ की हार है। ये उन सभी परिवारों की जीत हैं जिन्होंने अपने खून, अपने बच्चों को खोया, क्योंकि यह सरकार भ्रष्टाचारी है। ये साझा विपक्ष की जीत है, जिन्होंने छात्रों के हित में संसद से सड़क तक आवाज उठाई। अब बारी है मोदी जी को हमारी युवा पीढ़ी से माफी मांगने की और जिन्होंने उनपर लाठी-डंडे-पेलेट गन चलवाई है, उनपर कठोर कार्रवाई करने की।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार को भारत के युवाओं और छात्रों के आगे झुकना पड़ा। प्रियंका ने इसे देश के युवाओं और छात्रों की जीत करार दिया, जो झुके नहीं। उन्हों कहा, "युवा नहीं झुके; सरकार को झुकना पड़ा। यह भारत के युवाओं और छात्रों की जीत है। जब मैंने यह खबर सुनी तो मैं वास्तव में बहुत खुश हुई। मैं थोड़ी भावुक भी हो गई।"
प्रियंका गांधी ने कहा कि मैं कई वजहों से बहुत खुश हूं, लेकिन मुख्य वजह यह है कि मेरा मानना है कि आज वह दिन है जब हमारे देश के लोगों ने अपना देश उन लोगों से वापस लेना शुरू कर दिया है जिन्होंने संविधान को नष्ट करने की कोशिश की, जिन्होंने हमारे लोगों की आवाज़ को दबाने और कुचलने की हर मुमकिन कोशिश की। मेरा मानना है कि यह भारत के युवाओं की जीत है। मुझे उन सभी पर बहुत गर्व है। वे सभी जो बाहर निकले और अपनी बात के लिए खड़े हुए। उन्होंने ठीक वैसे ही किया जैसा महात्मा गांधी ने हमें सिखाया था।
प्रियंका ने कहा कि उन्होंने अहिंसक तरीके से ऐसा किया। उन पर पैलेट गन चलाई गईं। उनके खिलाफ आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्हें लाठियों से पीटा गया। उन्हें गंभीर चोटें आईं, लेकिन वे झुके नहीं। इसके बजाय, सरकार को उनकी इच्छा के आगे झुकना पड़ा। यह इस देश के हर शासक के लिए एक सबक है, आज और हमेशा के लिए: आपको लोगों की इच्छा सुननी होगी। यह एक लोकतंत्र है। लोगों की इच्छा सर्वोपरि है। इससे ऊपर कुछ भी नहीं है। कोई इंसान, कोई नेता, कोई तानाशाह और कोई भी ताकत भारतीय लोगों की इच्छा को नहीं रोक सकती। आज, हमारे छात्रों और युवाओं ने यह साबित कर दिया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को युवा पीढ़ी और विपक्ष की जीत करार देते हुए कहा कि अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि प्रधान का इस्तीफा उस युवा पीढ़ी के संघर्ष की जीत है जो एक ‘अनुचित और भ्रष्ट व्यवस्था’ से थक चुकी है और यह छात्रों के साथ विपक्ष की ‘चट्टान जैसी एकजुटता और समर्थन’ की भी जीत है।
उन्होंने कहा, "युवाओं के लगातार दबाव ने आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी को प्रधान को राजनीतिक संरक्षण देना बंद करने के लिए मजबूर किया।" रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधान ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की बात स्वीकार करने से लगातार इनकार किया और परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अपनी प्रेस वार्ता में भी जानबूझकर ‘लीक’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी पार्टी की लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लड़ाई किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम से है और यह आगे भी जारी रहेगी। इस देश की युवा पीढ़ी ने साबित कर दिया है कि ज़ुल्म की हज़ारों चोटों का सामना करने के लिए हिम्मत भरी एक आवाज ही काफ़ी है। उन छात्रों को न सिर्फ वहां से खदेड़ा गया, उन पर लाठियां बरसाई गईं, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, बल्कि पेलेट गन और शॉक बैटन का भी इस्तेमाल हुआ। इतना ही नहीं, हमने उन नेताओं को भी सड़कों पर घसीटे जाते देखा जिन्होंने उनके हक में आवाज उठाई थी। हमने राहुल गांधी को घसीटे जाते देखा।
पवन खेड़ा ने कहा कि मोदी सरकार का घमंड टूटते हुए हमने हर दिन देखा। उन्होंने दावा किया कि युवाओं और छात्रों के संघर्ष ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया और यह जवाबदेही की लड़ाई की जीत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों के साथ हुए अन्याय पर कार्रवाई और जवाबदेही की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगी।
उन्होंने कहा कि मोदी जी आपने तो रील बनाकर फ्रेंड कह दिया लेकिन ये छात्र आपको फ्रेंड नहीं मानते ना ही इस देश के आप दोस्त हैं। खेड़ा ने कहा कि 20 जुलाई को जो हिंसा हुई उसकी जवाबदेही तय करनी पड़ेगी। मैंने पहली बार देखा की बीजेपी वाले मोदी के वीडियो में आ रहे भद्दे कमेंट का जश्न मना रहे हैं। मोदी जी ये जान लीजिए आपको देश से माफी तो मांगनी पड़ेगी, ये हमारी मांग है। खेड़ा ने कहा कि जब आप माफी मांग लेंगे उसके बाद शिक्षा प्रणाली को कैसे सही करें इसकी चर्चा संसद में होगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने एक्स पोस्ट में कहा कि यह भारत के युवाओं की जीत है। आपकी ताकत ने धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। यह जनता की जीत है, उन सभी लोगों की जीत है जिन्होंने हमारे सिस्टम में जवाबदेही के लिए लड़ाई लड़ी। जिस पल नीट का पेपर लीक हुआ, तभी से कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। विपक्ष एकजुट होकर जवाबदेही की एक ही मांग के साथ इस विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा था।
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हमारी अन्य मांगें हैं कि हमारे छात्रों पर हमला करने वालों को सजा मिले और छात्रों को जो परेशानियां झेलनी पड़ीं, उसके लिए पीएम माफी मांगें। हालांकि, शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए हमारा आंदोलन जारी रहेगा। जब तक हम सिस्टम में निष्पक्षता नहीं लाते, छात्रों पर दबाव कम नहीं करते और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं करते, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। देशभर के उन लाखों छात्रों को बहुत-बहुत सलाम जिन्होंने इस सरकार को अपनी इच्छा के आगे झुकने पर मजबूर किया और राहुल गांधी को भी, जो उनके मुद्दे के सबसे मुखर, सच्चे और प्रतिबद्ध समर्थक बने रहे।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह नई पीढ़ी की एक बड़ी जीत है, सरकार को प्राइमरी शिक्षा से लेकर हायर एजुकेशन तक हर चीज के बारे में बहुत गंभीरता से सोचना होगा। एग्ज़ाम पेपर लीक होने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। आज के दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिये और सड़कों पर फैले युवाओं के इस आंदोलन ने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी- जो दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और जिसके अनगिनत सहयोगी हैं- को झुकने पर मजबूर कर गया। यह युवाओं की एक बड़ी जीत है, लेकिन सभी राजनीतिक दलों के लोगों को इससे यह सीखना चाहिए कि भविष्य में परीक्षाओं की व्यवस्था को मजबूत करना होगा ताकि कोई पेपर लीक न हो और युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के रास्ते खोलने होंगे।
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने एक्स पर लिखा कि नीट पेपर लीक मामले में दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं ने लगातार 28 दिनों तक जो संघर्ष और दृढ़ संकल्प दिखाया, वह वाकई तारीफ के काबिल है। प्रदर्शनकारियों की लगातार मांग के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया है। यह लड़ाई, जो बिना डरे दमन के खिलाफ मजबूती से लड़ी गई और सरकार को अन्याय के खिलाफ नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने पर मजबूर किया, यह लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है। यह देश में युवा शक्ति की एकता की एक बड़ी जीत है। साथ ही विपक्षी दलों के सभी सांसदों का भी दिल से शुक्रिया, जिन्होंने देश के युवाओं को नैतिक और संसदीय समर्थन दिया। मैं निश्चित रूप से यह कहना चाहूंगा कि देश में लोकतंत्र की जीत हुई है और इसका श्रेय निस्संदेह देश की युवा पीढ़ी को जाता है।
एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले ने एक्स पोस्ट में लिखा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, छात्रों और विपक्ष के लगातार दबाव के बाद ही आया है। मैं नीट यूजी मुद्दे पर डटे रहने वाले हर प्रदर्शनकारी को बधाई देती हूं। लेकिन यह अंत नहीं हो सकता। हम असल जवाबदेही, व्यापक शैक्षिक सुधार और संसद में नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग करते हैं।
इससे पहले छात्रों के एक महीने से भी ज्यादा समय से जारी आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि "राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।" उन्होंने एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा कि उन्होंने शुरू से ही पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश के युवाओं का भविष्य राजनीतिक विवादों या कानूनी पेचीदगियों में उलझे। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेजने का निर्णय लिया।
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए