
संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वाधान में गुरुवार सुबह 11 बजे गाजीपुर बॉर्डर से पलवल तक किसानों की ट्रैक्टर यात्रा निकलेगी। किसान नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में ये ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि नए कृषि कानून किसनों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो किसान कृषि क़ानूनों का विरोध करते हैं हम उनसे चर्चा करते हैं। किसान यूनियन जो आंदोलित हैं वो कृषि सुधार बिलों की भावनाओं को समझेंगे और किसानों के हितों का ध्यान देंगे, सकारात्मक रूप से हम चर्चा करके समाधान निकालेंगे।
दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर किसानों की सेवा करते सेना का एक जवान नजर आया। बर्फबारी के चलते कश्मीर की फ्लाइट रद्द होने के बाद वह सिंघु बॉर्डर पर पहुंचा और लंगर की सेवा में लोगों को खाना खिलाया। कैथल का रहने वाले जवान ने कहा कि देश की तरह किसान भी हमारी जिम्मेदारी है, अगर सरकार नाराज हुई तो नौकरी छोड़ दूंगा।
किसान नेता गुरनाम सिंह चंदूनी ने कहा कि जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी तब तक हम नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि दो कदम आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का इम्तिहान ले रही है। सरकार सोच रही है कि किसान कमजोर हो जाये या फिर टूट कर वापस चला जाएं, जिद पकड़ कर बैठी सरकार का हाल कही जूते खाने वाले वाला न हो जाए।
किसानों और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता बेनतीजा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि हमें उम्मीद है कि जल्द ही यह गतिरोध खत्म होगा।
नए कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को लेकर कुछ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम किसान आंदोलन और कृषि कानूनों की अर्जी पर सोमवार को सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबड़े ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें हालात में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा कि हम हालात से वाकिफ हैं और चाहते हैं कि बातचीत और बढ़े। हम हालात पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए हैं।
किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि जैसे-जैसे बारिश हो रही है और किसान भीग रहे हैं, वैसे-वैसे नई दिल्ली की राजनीति की बदबू सामने आ रही है।
शिवसेना ने किसानों के आंदोलन को लेकर एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा, “कृषि कानून को रद्द करवाने को लेकर किसान डटे हुए हैं। दिल्ली की सीमा पर अब तक 50 किसानों ने अपनी जान गंवा दी है। सरकार की नजर में इन किसानों के बलिदान की कोई कीमत नहीं है। सरकार में इंसानियत होती तो कृषि कानून को तुरंत स्थगित करवाती और किसानों की जान से खेले जाने वाले इस खेल को रोकती।”
टिकरी बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन आज 42वें दिन भी जारी है। प्रदर्शन स्थल पर कश्मीरी युवा पिछले एक महीने से लंगर दे रहे हैं। उन्होंने बताया, "यहां लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। हम हर तरह का लंगर चला रहे हैं। जो कुछ भी हमारे पास है हम दे रहे हैं।"
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का विरोध-प्रदर्शन आज 40वें दिन भी जारी है।
कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की मुश्किलें बारिश की वजह से बढ़ गई हैं। दिल्ली और एनसीआर में बारिश हो रही है। बारिश की वजह से कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर विरोध-प्रदर्शन कर रहें किसान भी प्रभावित हुए। बारिश के बीच किसान बॉर्डर पर डटे हुए हैं।
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Published: 06 Jan 2021, 9:35 AM IST