
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। अक्सर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों से बदहाली की तस्वीरें सामने आती रहती हैं। ताजा बदहाली की तस्वीर सोनभद्र के सिविल अस्पताल में सामने आई है। यहां बिजली न होने की वजह से डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में बच्चे की डिलीवरी कराई। खुद पीड़िता के भाई ने पूरे मामले को उजाकर किया है। पीड़िता के भाई ने बताया, “बिजली जाने की वजह से अंधेरे में मेरी बहन की डिलीवरी हुई। यहां जनरेटर वगैहर सब है लेकिन, उसके बाद भी ऐसा हुआ।"
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जैसे ही यह खबर सुर्खियां बनी सोनभद्र के सीएमओ अशोक कुमार सामने आए और पूरे मामले पर सफाई दे डाली। उन्होंने कहा कि बिजली जाने और जनरेटर चालू करने के बीच के समय में यह डिलीवरी हुई थी। ऐसा आगे न हो इसलिए हमने प्रसव केंद्र में एक इनवर्टर की व्यवस्था कर दी है। यहां सोलर पैनल भी है जो काफी सयम से खराब है जिसकी सूचना अभी मिली है। इसको जल्द ठीक कराया जाएगा। सवाल यह है कि बिजली जाने और जनरेटर चालू करने के बीच में इतना समय लग गया कि बच्चे की डिलीवरी हो गई? सवाल यह भी है कि अगर काफी दिनों से अस्पताल का सोलर पैनल खराब नहीं था तो उसे ठीक क्यों नहीं कराया गया। आखिर इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है?
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