
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार भोजशाला मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए विवादित परिसर को देवी वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र माना है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक जांच यह स्थापित करती है कि भोजशाला मूल रूप से राजा भोज के समय का संस्कृत अध्ययन केंद्र था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुरातत्व एक विज्ञान है और अदालत वैज्ञानिक निष्कर्षों पर सुरक्षित रूप से भरोसा कर सकती है।
हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की उस याचिका पर फैसला सुनाया, जिसमें भोजशाला के मूल स्वरूप को हिंदू मंदिर घोषित करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि विवादित स्थल पर हिंदू पूजा की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने यह भी माना कि यह संरचना 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है और इसका धार्मिक चरित्र भोजशाला तथा देवी वाग्देवी सरस्वती मंदिर के रूप में स्थापित होता है।
Published: undefined
अदालत ने वर्ष 2003 में ASI द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें हिंदू पक्ष के पूजा अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि यह आदेश हिंदू पक्ष के अधिकारों को सीमित करता था, इसलिए इसे निरस्त किया जाता है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर के प्रबंधन, संरक्षण और संस्कृत शिक्षा से जुड़े फैसले लेने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि पूरे परिसर का प्रशासन और प्रबंधन ASI के पास ही रहेगा। साथ ही सरकार को तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है।
Published: undefined
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष के लिए भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय चाहे तो धार जिले में नमाज के लिए अलग जमीन की मांग सरकार के सामने रख सकता है। अदालत ने कहा कि सरकार का संवैधानिक दायित्व सिर्फ संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाली संरचनाओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखना भी उसकी जिम्मेदारी है।
जुलाई 2024 में ASI ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा की थी। रिपोर्ट में परिसर के भीतर मंदिरनुमा अवशेष, मूर्तिकला और स्थापत्य संबंधी कई संकेत मिलने की बात कही गई थी। अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक और पुरातात्विक निष्कर्षों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और देश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण संविधान की भावना का हिस्सा है।
Published: undefined
भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने फैसले को “बहुत ही ऐतिहासिक” बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने साफ तौर पर पूरे परिसर को हिंदू मंदिर माना है और हिंदू पक्ष के लगभग सभी तर्क स्वीकार किए हैं। विष्णु जैन ने यह भी कहा कि लंदन के संग्रहालय में रखी देवी वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की मांग पर भी अदालत ने विचार करने को कहा है।
Published: undefined
इतिहास के अनुसार, लगभग एक हजार साल पहले धार में परमार वंश का शासन था। 1000 से 1055 ईस्वी तक राजा भोज ने यहां शासन किया और 1034 ईस्वी में संस्कृत शिक्षा के लिए एक महाविद्यालय की स्थापना कराई, जिसे बाद में भोजशाला कहा गया। मान्यता है कि 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने इस संरचना को ध्वस्त कराया। बाद में 1401 ईस्वी में दिलावर खान गौरी और 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी ने यहां मस्जिद के हिस्से बनवाए। वर्ष 1875 में हुई खुदाई में यहां से देवी सरस्वती की प्रतिमा भी मिली थी।
Published: undefined
Google न्यूज़, व्हाट्सएप, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined