
कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर यूपीआई लेनदेन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। उन्होंने केंद्र पर इस पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी का भी आरोप लगाया।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि सरकार द्वारा हाल में जारी अधिसूचना से 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाने की बात स्पष्ट होती है, लेकिन 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी सवाल किया कि क्या यह सब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए अमेरिकी कंपनियों के वास्ते डिजिटल भुगतान का रास्ता खोलने के मकसद से किया जा रहा है?
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि क्या भविष्य में बड़ी राशि के यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाया जा सकता है और क्या इसका बोझ व्यापारियों या आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था में किसी भी राशि के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं लिया जाता है।
रमेश ने संशोधित भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार कानून में ऐसी व्यवस्था कर रही है, जिससे आगे चलकर यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में अधिसूचना के जरिए 2,000 रुपये की सीमा में बदलाव किया जा सकता है। कांग्रेस महासचिव ने यह भी आशंका जताई कि आने वाले समय में व्यक्ति-से-व्यक्ति होने वाले यूपीआई भुगतान पर भी शुल्क लगाया जा सकता है।
जयराम रमेश ने कहा कि जैसा कि हमने 6 अगस्त 2026 को चेतावनी दी थी, जिस पर माननीय वित्त मंत्री ने खुद जवाब देना उचित समझा था-मोदी सरकार अब संसद से जबरन पारित कराए गए नए कानूनों का इस्तेमाल करके UPI पर चार्ज लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।
संशोधित Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत अभी एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जो बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स को केवल 2,000 रुपये से कम के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने से रोकता है। लेकिन इस सीमा से ऊपर के किसी भी ट्रांजैक्शन के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि साफ तौर पर हम सभी से UPI ट्रांजैक्शन पर फीस वसूलने की जमीन तैयार की जा रही है। कल इसी तरह के एक और नोटिफिकेशन के जरिए यह सीमा भी बदली जा सकती है-अब कानून में इसकी कोई गारंटी नहीं है। जहां तक हमें पता है, सरकार रोजमर्रा के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के UPI ट्रांजैक्शन पर भी चार्ज लगा सकती है।
मोदी सरकार ने एक बार फिर ईमानदारी और पारदर्शिता की पूरी तरह कमी दिखाई है और यूजर्स का भरोसा तोड़ा है। क्या यह सब राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने के लिए अमेरिकी कंपनियों के लिए डिजिटल पेमेंट्स का रास्ता खोलने के मकसद से किया जा रहा है?
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए